रायगढ़ :पुसौर तहसील क्षेत्र के उपार्जन केन्द्र बुनगा में धान खरीदी दौरान गंभीर अनियमितता सामने आने व प्रकरण दर्ज होने के बाद भी संबंधित दोषियों पर अब तक किसी भी प्रकार की कार्यवाही नहीं होने से अन्य केन्द्रों में भी इस तरह की अनियमितता अक्सर देखी जा रही है इसे प्रषासन की सह कहा जाये अथवा लापरवाही यह तो पता नहीं लेकिन किसानों की जहां जीवन भर की कमाई इनके अनियमिताओं के कारण वहीं खरीदी कार्य से जुडे लोगों की जेबे भर रहे हैं। ज्ञात हो कि शासन द्वारा निधारित मानक वजन से अधिक धान खरीदे जाने बारदाना स्टॉक में अंतर पाये जाने तथा मोटा किस्म धान की खरीदी दर्शा सरना धान खरीदे जाने के मामले को गंभीरता से लेते हुये बिते महिने कार्यवाही की गई जिसमें कलेक्टर मयंक चर्तुेवदी के निर्देष पर गठित संयुक्त जांचदल द्वारा उपर्जन केन्द्र मौके पर पहुंच कर भैतिक सत्यापन किया था, जांच के दौरान धान खरीदी निति 2025-26 का उल्लंघन पाया जिसके आधार पर संबंधितों के विरूद्ध प्रकरण दर्ज किया गया वहीं कलेक्टर ने निर्देषित करते हुये कहा था कि धान खरीदी व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही अनियमितता या भ्रश्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।
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तात्कालीन समय में जिला खाद्य अधिकारी चितरंजन सिंह के जानकारी अनुसार बुनगा में प्राप्त शिकायत के आधार पर तहसीलदार, खाद्य निरीक्षक सहकारिता निरीक्षक एवं अपेक्स बैंक के पर्यवेक्षक द्वारा भौतिक सत्यापन किया। संयुक्त दल द्वारा एक दिन पुर्व खरीदी गई धान की बोरियों का रेंडम वजन लिया गया जिसमें औसतन 40 किलो 915 ग्राम पाया वही स्टेक में रखी बोरियों का औसत वजन 40 किलो 820 ग्राम पाया गया जो कि शासन द्वारा निर्धारित मानक वजन से अधिक है इसके अतिरिक्त स्टाक के भौतिक सत्यापन में 116 बोरा धान अतिरिक्त पाया गया।
आन लाईन खरीदी पत्रक के अनुसार उपर्जान केन्द्र में सरना धान 2205 क्विटल होना चाहिये जबकि भौतिक सत्यापन में 2580 क्विं सरना धान पाया गया वही 1558 क्विंटल मोटा धान के विरूद्ध केवल 1188 क्विंटल पाया गया इससे यह स्पष्ट हो गया कि उपार्जन केन्द्र में मोटा किस्म धान की खरीदी दर्शाकर सरना खरीदी की जा रही थी इसके साथ पुराने वारदाने के उपयोग में भी अनिमितता पाई गई तथा खाली बारदाना के स्टाक में भी अंतर पाया गया। इस तरह उपार्जन केन्द्र में व्यापक स्तर पर गडबडी पाये जाने के चलते जांच दल द्वारा विधिवत प्रकरण दर्ज कर लिया गया। इस मौके पर डिलेष्वर आपरेटर अभिलाश गुप्ता बारदारी प्रभारी श्यामसुंदर साव उपस्थित थे। प्रशासनिक कसावट और न्याय हित में देखा जाये तो प्रकरण दर्ज होने के बाद कार्यवाही होना चाहिये जो अब तक नहीं हुआ जिसके कारण लोगों में अब शासन के न्यायप्रियता पर भरोसा उठने लगा है।
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