रायगढ़ : रायगढ़ क्षेत्र में पीडीएस चावल की कालाबाजारी लंबे समय से जारी है, लेकिन खाद्य विभाग की कार्रवाई अब तक प्रभावी नहीं रही है। शासन की योजना के तहत गरीबों को सस्ते दरों पर चावल उपलब्ध कराना है, लेकिन संगठित गिरोह बीपीएल और एपीएल कार्डधारकों के नाम पर मिलने वाले चावल को बाजार में ऊंचे दामों पर बेचकर लाभ कमा रहे हैं।
मामला बोइरदादर पीडीएस दुकान के बगल मे एक चावल कोचिए के द्वारा पीडीएस चावल की खरीदी की जा रही जानकारी के अनुसार तस्कर बीपीएल और एपीएल कार्डधारकों से 21 रुपए प्रति किलो की दर पर चावल राशन दुकानों से खरीदते हैं। इसे सफेद प्लास्टिक के बोरों में भरकर विभिन्न स्थानों पर स्टॉक किया जाता है। पर्याप्त मात्रा तैयार होने के बाद यह चावल स्कूटी या पिकअप वाहन में भरकर ले जाया जाता है और अधिक कीमत पर बेचा जाता है। इससे सरकार की योजना प्रभावित होती है और गरीब परिवारों का हक छीना जा रहा है।
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पीडीएस के चावल की कालाबाजारी जोरो सोरो से हो रही है इसलिए गरीबों के हक पर डाका डालने वालों के हौसले बढ़े हुए हैं। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को चाहिए कि शासन की योजनाओं का लाभ जरुरतमंद हर व्यक्ति को मिले। ऐसी व्यवस्था की जाए। खाद्यान्न माफिया व भ्रष्ट अमले पर नकेल कसने के लिए अब कड़े कदम उठाने चाहिए। वितरण व्यवस्था के लिए जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों की समय-समय पर वरिष्ठ अधिकारियों को मॉनीटरिंग करनी चाहिए। साथ ही कहीं भी कोई गड़बड़ी होने पर संबंधित पर सख्त कार्रवाई कर उसे दंडित किया जाना चाहिए।
जानिए… कालाबाजारी का पूरा खेल
चावल कोचिए दलाल के माध्यम से राइस मिल तक पीडीएस चावल को खपाते हैं। वे उचित मूल्य की दुकान से सीधे खरीदते हैं। उसी चावल को मिलर तक पहुंचाते है। मिलर उसी चावल को फिर कस्टम मिलिंग के नाम पर नाना में जमा करा देते है।
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