अगर आप भी आम की बागवानी करते हैं तो जनवरी का महीना आपके लिए सबसे अहम माना जाता है. यही वह समय होता है जब आम के पेड़ों में मंजर आने की तैयारी शुरू होती है. थोड़ी सी लापरवाही पूरी फसल पर भारी पड़ सकती है. आमतौर पर किसानों के मन में यह सवाल रहता है कि जनवरी में ऐसा क्या करें जिससे मंजर सुरक्षित रहे और अच्छी उपज मिल सके. डॉ. राजेंद्र प्रसाद सेंट्रल एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, पूसा के वैज्ञानिकों से खास बातचीत की. वैज्ञानिकों ने बताया कि जनवरी वह निर्णायक समय है जब मिली बग जैसे खतरनाक कीट का नियंत्रण कर लिया जाए. तो आगे चलकर पुष्पन और फलन दोनों सुरक्षित रह सकते हैं.
आम की फसल का सबसे खतरनाक दुश्मन
मिली बग आम की खेती में पाई जाने वाली सबसे विनाशकारी और नियमित कीट समस्या है. यह एक रस चूसने वाला कीट है, जो मंजर, कोमल पत्तियों, फूलों और छोटे फलों पर हमला करता है. वैज्ञानिकों के अनुसार यह कीट पौधों का रस चूसकर उन्हें कमजोर कर देता है. शहदनुमा पदार्थ छोड़ता है, जिस पर काली फफूंद विकसित हो जाती है. इसका सीधा असर मंजर झड़ने, फल गिरने और गुणवत्ता खराब होने के रूप में दिखाई देता है. कई मामलों में 30 से 80 प्रतिशत तक उपज का नुकसान दर्ज किया गया है. यदि समय रहते इसका प्रबंधन न किया जाए, तो किसान को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ सकती है.
ये भी पढ़े : मुखिया के मुखारी -पक्ष -विपक्ष मस्त,छत्तीसगढ़िया पस्त है
जनवरी में सबसे कारगर उपाय
पूसा के वैज्ञानिकों ने बताया कि मिली बग का जीवन चक्र मिट्टी से जुड़ा होता है. मादा कीट गर्मी के मौसम में मिट्टी में अंडे देती है और दिसंबर-जनवरी में उनसे निम्फ निकलते हैं. ये निम्फ उड़ नहीं सकते और मुख्य तने के सहारे ऊपर चढ़कर फरवरी-मार्च में मंजर पर हमला करते हैं. इसी रास्ते को रोकने के लिए पॉलीथिन शीट तकनीक बेहद प्रभावी मानी गई है. जनवरी के पहले या दूसरे सप्ताह में जमीन से 30-45 सेंटीमीटर ऊपर तने पर 20-25 सेंटीमीटर चौड़ी चिकनी पॉलीथिन शीट कसकर बांध दी जाती है. इसके ऊपरी किनारे पर ग्रीस या जली हुई मोबिल ऑयल की हल्की परत लगा दी जाए तो मिली बग आगे नहीं बढ़ पाते. यह एक सरल, सस्ती और पर्यावरण-अनुकूल तकनीक है.
समेकित कीट प्रबंधन से मिलेगा अधिक लाभ
वैज्ञानिकों के अनुसार पॉलीथिन शीट तकनीक को अगर समेकित कीट प्रबंधन यानी IPM के साथ अपनाया जाए तो इसका असर और भी बेहतर होता है. इसके तहत तने के चारों ओर मिट्टी की गहरी खुदाई, बाग की नियमित सफाई, खरपतवार हटाना और चींटियों का नियंत्रण जरूरी है. क्योंकि चींटियां मिली बग को संरक्षण देती हैं. जरूरत पड़ने पर सीमित मात्रा में जैविक कीटनाशकों का प्रयोग भी किया जा सकता है. बदलते जलवायु परिदृश्य में जब सर्दियां अनिश्चित हो रही हैं, तब जनवरी में इस तरह का यांत्रिक नियंत्रण किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है. सही समय पर सही तकनीक अपनाकर किसान भाई आम की बेहतर उपज और अच्छी गुणवत्ता सुनिश्चित कर सकते हैं.
.jpeg)
.jpeg)
.jpeg)

Comments