बस्तर के बहुप्रतीक्षित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में रोजगार पर बरपा हंगामा, कर्मचारियों ने जड़ा ताला

बस्तर के बहुप्रतीक्षित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में रोजगार पर बरपा हंगामा, कर्मचारियों ने जड़ा ताला

जगदलपुर: बस्तर संभाग के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती देने के उद्देश्य से डिमरापाल में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल बनाया गया है. साल 2026 में इसकी औपचारिक शुरुआत हो जाएगी. जिस अस्पताल से समूचे बस्तरवासियों ने बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और स्थानीय युवाओं ने रोजगार की उम्मीदें पाल रखी थीं, वहां अब प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच आर-पार की जंग छिड़ गई है.

100 से ज्यादा कर्मचारियों ने बंद किया काम

दरअसल अस्पताल के नवनिर्मित परिसर में लंबे समय से सुरक्षा और सफाई की जिम्मेदारी संभाल रहे कर्मचारियों को नए टेंडर के नाम पर बाहर का रास्ता दिखाए जाने की चेतावनी ने आग में घी डालने का काम किया है. जिससे नाराज होकर सैकड़ों कर्मचारियों ने शनिवार से अस्पताल के मुख्य द्वार पर ताला जड़कर अनिश्चितकालीन हड़ताल का बिगुल फूंक दिया है.

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नए कंपनी के टेंडर से नौकरी जाने का खतरा

अस्पताल की हाउसकीपिंग सुपरवाइजर कृष्णा नाग ने प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने पिछले डेढ़ साल से विपरीत परिस्थितियों में इस संस्थान को अपनी सेवाएं दी हैं, लेकिन अब नई कंपनी के आते ही उनके अनुभव और मेहनत को नजरअंदाज किया जा रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि इतने बड़े अस्पताल में श्रम शक्ति की भारी जरूरत है, इसके बावजूद पुराने कर्मचारियों को प्राथमिकता देने के बजाय उन्हें निकाला जाना अन्यायपूर्ण है. फिलहाल प्रबंधन केवल आधे कर्मचारियों को ही वापस लेने की बात कह रहा है, जिसे आंदोलनकारी कर्मचारियों ने सिरे से खारिज करते हुए सभी की पूर्ण बहाली तक मोर्चा न छोड़ने की कसम खाई है.

पुराने 100 से ज्यादा लोगों में से सिर्फ 40 को नौकरी

सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभाल रही संतोषी मंडावी ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि आने वाली कंपनी केवल 40 लोगों को रोजगार देने की बात कह रही है. ऐसे में उन दर्जनों परिवारों का भविष्य अधर में लटक गया है जो अपने छोटे बच्चों को घर छोड़कर पूरी निष्ठा से यहां काम कर रहे थे. उन्होंने यह भी खुलासा किया कि इस मुद्दे को लेकर बस्तर के तमाम जिम्मेदार अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के दरवाजे खटखटाए गए, लेकिन हर जगह से केवल खोखले आश्वासन ही हाथ लगे. जिसके कारण आज उन्हें मजबूरी में सड़क पर उतरकर अस्पताल के गेट पर ताला जड़ने जैसा कड़ा कदम उठाना पड़ा है.

अस्पताल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

​वर्तमान में अस्पताल परिसर किसी छावनी जैसा नजर आ रहा है क्योंकि सुरक्षा के लिहाज से वहां भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है. कर्मचारियों का यह विरोध न केवल प्रबंधन की नीतियों के खिलाफ है, बल्कि यह उस व्यवस्था पर भी चोट है जो विकास के नाम पर स्थानीय लोगों का रोजगार छीनने का काम कर रही है.

कर्मचारियों की चेतावनी

जब तक प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन पुराने कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने का लिखित आश्वासन नहीं देता, तब तक यह हड़ताल जारी रहने की चेतावनी दी गई है. इस गतिरोध ने न केवल अस्पताल के सुचारू संचालन पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि बस्तर के जनमानस में शासन-प्रशासन के प्रति भारी असंतोष पैदा कर दिया है.










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