आज के समाज में गेहूं की खेती बड़ा आधार है, लेकिन मौसम में हुए उतार-चढ़ाव की वजह से इस बार शुरू से ही अलग-अलग तरह की दिक्कतें देखने को मिल रही है. इसमें कभी गेहूं की पत्तों पर धब्बे आ जा रहे तो कभी गेहूं के पौधों का अच्छा विकास न हो पाने के कारण खेत में बीच-बीच में फसल खाली रह जा रही है. ऐसे में सिर्फ एक चीज से ये दिक्कतें दूर हो सकती हैं. जानें...
कहीं गेहूं के पौधों का सूखना, कही गेहूं का छोटा रह जाना तो कहीं फसलों में पीलेपन की समस्या भी आ रही है. वहीं कहीं-कहीं गेहूं का सही तरह से अंकुरण नहीं होने से खेतों के बीच-बीच में जगह खाली रह गई या यूं कहें कि गेहूं के पौधों में कल्लो का फुटाव ठीक ढंग से नहीं हो पाया, जिससे फसल के बीच में छिरके दिखाई दे रहे हैं.
अगर किसान चाहते हैं कि उनका उत्पादन ज्यादा प्रभावित न हो, खेत के बीच की खाली जगह फिर भर जाएग तो इसके लिए उन्हें सिंचाई करने के बाद यूरिया के साथ माइकोराइजा का छिड़काव करना है. एक एकड़ में 1 किलो के पैकेट का छिड़काव करना पड़ता है, जिससे 10-15 दिन में फसल अच्छी दिखाई देने लगती है. इससे दाने मोटे और चमकदार हो जाते हैं. इसका उत्पादन पर साफ असर दिखता है.दूसरी सिंचाई के बाद किसान भाई 40 किलो यूरिया, 5 किलो जिंक और 5 किलो सल्फेट डालने के साथ माइकोराइजा का भी इस्तेमाल करें. माइकोराइजा की कीमत 400 रुपये किलो है.
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स्प्रे के माध्यम से 200 लीटर पानी में एक पैकेट को मिलकर इसका छिड़काव खेत में कर सकते हैं. ऐसा करने से निश्चित रूप से कल्लो में फुटव होता है. जैसे ही इसका छिड़काव करते हैं तो इसके बाद सिंचाई खुले रूप से करें, जिसका सीधा फायदा पौधों को होता है. स्प्रिंकलर करने से बचें.
माइकोराइजा डालने की वजह से जड़ों का विकास होता है. इन्हीं से अधिक कल्ले निकलते हैं. लगभग 5 गुना अधिक जड़े निकलती हैं. फिर पौधा इतना शक्तिशाली हो जाता है कि उसके लिए जिन पोषक तत्वों की जरूरत होती है, वह मिट्टी से खुद खींच लेता है.
माइकोराइजा डालने की वजह से पौधे की ग्रोथ अच्छी होती है. इसका तना मजबूत होता है. इसकी छोटी जड़ें होती हैं, वह अधिक गहराई तक मिट्टी में अपनी पकड़ बनाती हैं. इससे मिट्टी की गुणवत्ता में अभी सुधार आता है.
सागर के कृषि वैज्ञानिक केएस यादव बताते हैं कि गेहूं की फसल लेने वाले किसानों को मुख्यतः इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि अगर उनके पास फसल को देने 4 से 5 पानी है तो हर 20 से 25 दिन में उन्हें अपने गेहूं में सिंचाई करती रहना चाहिए. पहली, दूसरी, तीसरी बार में उर्वरक भी दें.
गेहूं में अगर पत्तों में पीले धब्बे आने की समस्या है तो किसान नाइट्रोजन के साथ-साथ जिंक और गंधक का भी छिड़काव करें. इससे यह समस्या भी दूर हो जाएगी. फसल जोरदार होगी. दाने बढ़िया निकलेंगे, जिससे मंडी में बढ़िया दाम मिलेंगे. किसान अच्छा मुनाफा कमा सकेंगे.
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