Agriculture tips:चने में हो रही इल्लियां? बिना खर्च अपनाएं ये देसी तरीका

Agriculture tips:चने में हो रही इल्लियां? बिना खर्च अपनाएं ये देसी तरीका

खरगोन जिला पूरी तरह कृषि पर निर्भर है. रबी सीजन में यहां करीब 1 लाख 55 हजार हेक्टेयर में देसी और डालर चने की खेती होती है. चना किसानों की आमदनी का बड़ा जरिया है. अगर फसल अच्छी रही तो साल भर की जरूरतें आराम से निकल जाती हैं. लेकिन इल्ली लग गई तो पूरा हिसाब बिगड़ जाता है.

कृषि वैज्ञानिक डॉ. जीएस कुलमी बताते हैं कि चने में फूल आने के समय सबसे ज्यादा खतरा रहता है. इसी स्टेज पर चने की इल्ली यानी हैलोथिस हमला करती है. इसके साथ पोर्टफ्लाई (तितली) कीट भी फसल को काफी नुकसान पहुंचाती है. कई बार तो पूरी फसल चंद दिनों में बर्बाद हो जाती है.

इल्ली से बचने के लिए किसान बाजार की दवाइयों का छिड़काव करते हैं. साथ ही कोई नाइट ट्रैप लगाता है तो कोई फेरोमन ट्रैप. लेकिन ये तरीके महंगे पड़ते हैं. छोटे किसान के लिए हर बार दवा डालना आसान नहीं होता. वहीं, देसी तरीके ऐसे किसानों के लिए काफी कारगर साबित होते है.

खेती में देसी तरीका सबसे सस्ता और टिकाऊ माना जाता है. विशेषज्ञों के मुताबिक चने की फसल लगे खेत में टी आकार की लकड़ी की खूंटियां गाड़ देनी चाहिए. यह एक सस्ता और टिकाऊ और घरेलू उपाय है. इससे इल्ली पर अपने आप कंट्रोल बन जाता है.

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इन खूंटियों का फायदा ये है कि पक्षी आकर इन पर बैठ जाते हैं. जैसे ही उन्हें पौधों पर इल्ली या कीड़ा दिखता है, वो तुरंत उसे खा जाते हैं. इससे बिना दवा डाले ही खेत साफ रहने लगता है. एक एकड़ में करीब 20 खूंटियां लगाना काफी माना जाता है.

किसान बताते हैं कि इस तरीके से दवा का खर्च भी बचता है और फसल भी सुरक्षित रहती है. क्योंकि, लकड़ियां आसनी से उपलब्ध हो जाती है और इन्हें लगाना भी आसान है.

खेती का खर्च लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में यह देसी तरीका किसानों के लिए बड़ी राहत है. न तो ज्यादा पैसा लगता है और न ही जमीन या फसल को नुकसान होता है. खरगोन के कई किसान यह तरीका अपनाकर चने की फसल को इल्ली से बचा रहे हैं.










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