जटाधारी फूल जिसे मुर्गा फूल या कॉक्सकॉमब भी कहा जाता है, यह फूल आसानी से और कम देखभाल में भी बेहतर खिलने वाली वैरायटी है . अब मिथिलांचल क्षेत्र में भी इसकी खेती किसानों के द्वारा की जा रही है. किसानों का मानना है कि पूरे साल इसके फूलों की डिमांड बनी रहती है, खासकर मिथिलांचल में जब छठ का वक्त आता है तो उसकी डिमांड और भी ज्यादा बढ़ जाती है.
बिहार के साथ पश्चिम बंगाल में रहती है डिमांड
जटाधारी फूल एक ऐसा फूल है जो एक बार लगा देने के बाद साल भर पौधे में फूल खिलता रहेगा. इसके साथ ही इस फूल की डिमांड बिहार में तो रहती है साथ ही वहीं पश्चिम बंगाल में इसकी डिमांड पूरे साल रहती है. यह फूल 18 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान में अच्छा ग्रोथ करता है. यदि आप इसकी बीज से पौधा तैयार करना चाहते हैं तो इसके लिए जमीन में नमी होना अति आवश्यक होती है. 7 से 10 दिनों में यह अंकुरण होने लगता है. जब आपकी नर्सरी तैयार हो जाए तो इसको रोकने के लिए आप शाम का वक्त का चयन कर सकते हैं.
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इस फूल की खास बात यह है कि यह लंबे समय तक मिला रहता है. इस पर किसी जानकारी देते हुए किसान अखिलेश बताते हैं कि इसका इस साल बीज गिरा का इसका पौधा लगाए हैं और काफी खुला हुआ है. लेकिन इस बार इसको बेचने की कोई बात नहीं है, इसके डिमांड बंगाल में बहुत ही ज्यादा है. वहां की महिला अपने बालों में इसका उपयोग करते हैं. एक खास मौके पर मिथिलांचल में छठ के वक्त इसका काफी डिमांड रहता है.
मुर्गा फूल: एक आकर्षक और लाभकारी फसल
इस फूल की खेती करने वाले किसानों को अच्छा मुनाफा होता है. इसकी डिमांड पूरे साल रहती है, जिससे किसानों को अपनी फसल बेचने में कोई परेशानी नहीं होती है. इसके अलावा, यह फूल आसानी से उगाया जा सकता है और इसकी देखभाल भी कम होती है, जिससे किसानों का समय और पैसा दोनों बचता है.
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