कम समय, कम देखभाल में अच्छी आमदनी: जनवरी में बो दें करेले की ये 5 टॉप किस्में,मिलेगी तगड़ी पैदावार

कम समय, कम देखभाल में अच्छी आमदनी: जनवरी में बो दें करेले की ये 5 टॉप किस्में,मिलेगी तगड़ी पैदावार

ज्यादातर किसान अब पारंपरिक फसलों की बजाय ऐसी फसलों की ओर बढ़ रहे हैं, जो कम समय में अच्छी आमदनी देती हैं. इन्हीं में से एक फसल है करेला. जनवरी-फरवरी का महीना इसकी खेती के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. इस समय बोई गई फसल जल्दी तैयार होकर किसानों को अच्छा मुनाफा देती है. सही तकनीक और समय पर बुवाई करने से उत्पादन बेहतर होता है और रोगों का खतरा भी कम रहता है. इस खबर में हम आपको बताएंगे करेले की कुछ ऐसी हाइब्रिड किस्मों के बारे में जो आपको कम समय, कम देखभाल में अच्छी आमदनी दिल सकती हैं.

किसान अब पारंपरिक फसलों की जगह अगेती फसलों पर अधिक ध्यान दे रहे हैं, क्योंकि ये कम समय में अच्छी आमदनी देती हैं. जनवरी-फरवरी का महीना अगेती सब्जियों की खेती के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. इस मौसम में करेला एक ऐसी फसल है, जो जल्दी तैयार होकर किसानों को अच्छा मुनाफा देती है. करेले की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी मांग सालभर बनी रहती है. खासकर अगेती करेला बाजार में जल्दी पहुंचने के कारण ऊंचे दामों पर बिकता है. यदि किसान उन्नत किस्म का चयन करें और सही तकनीक से खेती करें, तो महज दो से तीन महीने में अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं.

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जिला कृषि अधिकारी राजित राम ने बताया कि करेले की खेती के लिए फरवरी का महीना सबसे उपयुक्त माना जाता है. इस समय बोई गई फसल को अनुकूल मौसम मिलता है, जिससे पौधों की बढ़वार अच्छी होती है और उत्पादन बेहतर रहता है. समय पर बुवाई करने से फसल में रोगों का खतरा भी कम होता है. किसान उन्नत किस्मों की खेती कर गर्मियों में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.

पंजाब करेला-1 इस किस्म का करेला अपने लंबे आकार के लिए प्रसिद्ध है. इसके फल लंबे, पतले और सुर्ख हरे रंग के होते हैं. इसकी पहली तुड़ाई बुवाई के लगभग 66 दिन बाद की जा सकती है. प्रत्येक फल लगभग 50 ग्राम का होता है. इस किस्म से प्रति एकड़ औसतन 50 क्विंटल उपज प्राप्त की जा सकती है.

हिसार सलेक्शन करेला की इस किस्म को उत्तर भारत में अधिकतर उगाया जाता है. इसे अधिक पसंद किया जाता है और कई किसान इसी किस्म का प्रयोग करते हैं. इसके पौधे कम फैलाव वाले होते हैं, जो एक एकड़ के खेत से 40 क्विंटल तक उपज देते हैं.

अर्का हरित करेला की इस किस्म के फल मध्यम आकार के होते हैं. अन्य किस्मों की तुलना में ये कम कड़वे होते हैं और बीज भी कम होते हैं. इसकी खेती किसी भी मौसम में आसानी से की जा सकती है. प्रति एकड़ लगभग 36 से 48 क्विंटल तक उपज प्राप्त होती है.

नवभारती करेला एक हाइब्रिड किस्म है. इसके करेले का रंग आकर्षक हरा होता है और फल 20-22 सेमी लंबे होते हैं. यह किस्म बीज की बुवाई के लगभग 60 दिनों में पहली तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है. इसके प्रत्येक बेल में करीब 35 से 40 फल आते हैं.

पूसा विशेष करेला की इस किस्म की खेती उत्तर भारत में जनवरी से जून तक होती है. इसके फल मोटे और गहरे हरे रंग के चमकीले होते हैं. प्रति एकड़ इस किस्म से लगभग 60 क्विंटल उपज प्राप्त की जा सकती है.










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