कांग्रेस में अंदरूनी घमासान शकील अहमद के बाद अल्वी ने पार्टी नेतृत्व पर उठाए सवाल

कांग्रेस में अंदरूनी घमासान शकील अहमद के बाद अल्वी ने पार्टी नेतृत्व पर उठाए सवाल

नई दिल्ली: कांग्रेस में अंतर्कलह दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है। तिरुअनंतपुरम के सांसद शशि थरूर और पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं पार्टी के महासचिव रह चुके शकील अहमद की टिप्पणी से उपजा विवाद अभी पूरी तरह थमा भी नहीं था कि अब वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी ने भी पार्टी नेतृत्व पर सवाल खड़ा कर दिया है। पार्टी के आंतरिक कामकाज पर चिंता जताते हुए अल्वी ने कहा कि पार्टी नेतृत्व से मिलने के लिए एड़ी चोटी एक करना पड़ता है, फिर भी उनसे मुलाकात नहीं होती है।

उन्होंने कहा, “मैंने शकील जी का बयान नहीं देखा है, लेकिन कांग्रेस पार्टी में एक बड़ी समस्या यह है कि मुद्दों पर चर्चा करने के लिए कोई मंच नहीं है। नेताओं से मिलना आम तौर पर मुश्किल होता है। अगर लोगअपनी चिंताएं व्यक्त करना चाहते हैं, तो वे कहां जाएं? हर कोई कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) का सदस्य नहीं है। संवादहीनता की स्थिति निश्चित रूप से गंभीर है। यह कांग्रेस के भीतर एक बड़ी समस्याहै, और कई लोग शिकायत करते हैं कि पार्टी आला कमान से मिलना आसान नहीं है। संवाद की इस कमी को निश्चित रूप से दूर किया जाना चाहिए।''

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एएनआइ के अनुसार, अल्वी ने कांग्रेस छोड़ने वाले कई नेताओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, "इनमें से कोई भी मुस्लिम नेता भाजपा में शामिल नहीं हुआ है, जबकि सत्ता के लालच के कारण कई गैर-मुस्लिम नेता कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। यह चिंता का विषय है, क्योंकि कांग्रेस पार्टी में मुस्लिम नेतृत्व की अनदेखी की गई है। अगर मुस्लिम नेतृत्व की अनदेखी की जाती है तो असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेता देश में उभरते रहेंगे।"

गौरतलब है कि शकील अहमद ने शनिवार को राहुल गांधी को डरपोक और असुरक्षित नेता करार देते हुए आरोप लगाया था कि वह केवल उन युवा नेताओं को बढ़ावा दे रहे हैं जो पार्टी में उनका गुणगान करते हैं, उनकी चापलूसी करते हैं। इस बीच, रविवार को भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने कहा कि शकील अहमद की टिप्पणी से पता चलता है कि राहुल गांधी एक 'असुरक्षित नेता' हैं।

'पार्टी ने सबकुछ दिया, राहुल के खिलाफ बोलना शोभा नहीं देता'

आइएएनएस के अनुसार, शकील अहमद की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने उनके बयानों को अहसान फरामोशी करार देते हुए उन्हें नसीहत दी है। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस ने शकील अहमद को सब कुछ दिया, उन्हें केंद्रीय मंत्री, संचार मंत्री और राज्य नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपी। इतना सम्मान मिलने के बाद भी ऐसी क्या नाराजगी थी कि वे पार्टी से अलग हो गए। पार्टी ने उन्हें हर संभव मौका दिया, लेकिन वे चुनाव नहीं जीत सके।

तिवारी ने राहुल को एक 'निडर योद्धा' बताया जो भाजपा और मोदी सरकार के खिलाफ मजबूती से लड़ रहे हैं। उन्होंने अहमद को आगाह किया कि जिस पार्टी ने उन्हें पहचान दी, उसके खिलाफ बोलना उन्हें शोभा नहीं देता।यदि उन्हें कोई शिकायत थी, तो उन्हें इसे पार्टी फोरम पर रखना चाहिए था, न कि बाहर जाकर सार्वजनिक रूप से बयानबाजी करनी चाहिए थी।










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