पटना : बिहार की राजधानी पटना में नीट (NEET) की तैयारी कर रही एक 18 वर्षीय छात्रा की संदिग्ध मौत ने पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया है. आज पूरा देश जब 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस मना रहा है, लेकिन पटना की सड़कों पर इस छात्रा के लिए इंसाफ की मांग गूंज रही है.
इस मामले में पिछले 24 घंटों में जो खुलासे हुए हैं, उन्होंने बिहार पुलिस की शुरुआती सुसाइड थ्योरी की धज्जियां उड़ा दी है. फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की रिपोर्ट ने इस केस को एक ऐसा मोड़ पर ला दिया है, जिसने प्रशासन से लेकर सरकार तक कटघरे में खड़ा नजर आ रहा है. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि कौन वह गुमनाम चेहरा है, जिस पर बिहार पुलिस की शक की सूई घूम गई है? क्या बिहार पुलिस के बस में यह जांच करना? राज्य के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने एक बार बिहार पुलिस मुख्यालय में झंडा पहराने के बाद कहा है कि शंभू गर्ल्स हॉस्टल कांड के आरोपियों पर माला नहीं, मिट्टी चढ़ेगी. गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने यह बोलकर अपराधियों को सीधा अल्टीमेटम दिया है. लेकिन बड़ा सवाल आखिर कब तक?
सोमवार यानी 26 जनवरी को एफएसएल ने जांच के लिए पांच लोगों के सैंपल लिए हैं. इसमें मां-पिता और भाई के साथ मृतक छात्रा के दोनों मामा का सैंपल लिया गया है. सबों कै सैंपल मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में लिया गया है. इस दौरान एसआईटी की टीम भी मौजूद थी. अब मृतका के डीएनए से इस सैंपल के मिलान किए जाएंगे. इसके बाद उन लोगों के सैंपल लिए जाएंगे, जिनपर एसआईटी को शक है. फिलहाल एफएसएल ने छात्रा के बायोलॉजिकल रिपोर्ट बिहार पुलिस को सौंप दी है. इधर, परिजनों का साफ कहना है कि पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में ही गंदा काम हुआ है.
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि नीट छात्रा के अंडरगारमेंट्स पर मेल स्पर्म के सबूत मिलने के बाद क्या वह गुमनाम चेहरा पुलिस के रडार पर आ गया है? कौन है वो चेहरा, जिसने सिस्टम को बस में कर रखा है? इस केस की सबसे चौंकाने वाली और घिनौनी हकीकत तब सामने आई जब एफएसएल ने अपनी रिपोर्ट एसआईटी को सौंपी. रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि मृतका के कपड़ों लेगिंग्स और अंडरगारमेंट्स पर मानवीय स्पर्म (Semen) के निशान मिले हैं. यह रिपोर्ट उन आरोपों को पुख्ता करती है जो पीड़िता के माता-पिता पहले दिन से लगा रहे थे कि उनकी बेटी के साथ सामूहिक बलात्कार या यौन उत्पीड़न हुआ है.
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डीएनए प्रोफाइलिंग पर टिक गया जांच?
पुलिस अभी तक किसी एक नाम पर मुहर नहीं लगा पाई है, लेकिन जांच का दायरा अब डीएनए प्रोफाइलिंग पर टिक गया है. एसआईटी अब गिरफ्तार मुख्य आरोपी और हॉस्टल मालिक मनीष रंजन सहित उन सभी संदिग्धों के डीएनए सैंपल लेने वाली है, जो छात्रा के संपर्क में थे. इसमें हॉस्टल में काम करने वाले सभी मेल कर्मचारी भी शामिल हैं. इसमें हॉस्टल के कर्मचारी, कुछ करीबी परिचित और वे लोग शामिल हैं जिन्होंने छात्रा को बेहोशी की हालत में अस्पताल पहुंचाया था. एफएसएल अब इस स्पर्म के डीएनए का मिलान इन संदिग्धों के डीएनए से करेगी, जिससे उस असली दरिंदे का चेहरा बेनकाब होगा.
SIT के बाद अब सीआईडी की क्यों हुई एंट्री?
पुलिस, एसआईटी और सीआईडी की अब तक की कार्रवाई शुरुआत में पटना पुलिस ने इसे नींद की गोलियों के ओवरडोज और टाइफाइड से हुई मौत बताकर रफा-दफा करने की कोशिश की थी. लेकिन जब 16 जनवरी को पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जबरन पैठ (forceful penetration) और शरीर पर नाखून के निशान की बात सामने आई, तो सरकार को एसआईटी बनानी पड़ी.
निलंबन की गाज
लापरवाही बरतने के आरोप में कदमकुआं थाने के अतिरिक्त थाना प्रभारी हेमंत झा और चित्रगुप्त नगर थाना प्रभारी रोशनी कुमारी को निलंबित कर दिया गया है.
सीआईडी की एंट्री
रविवार को सीआईडी (CID) और एफएसएल की एक विशेष टीम ने चित्रगुप्त नगर स्थित शंभू हॉस्टल का दोबारा मुआयना किया. टीम ने छात्रा के कमरे से डिजिटल सबूत और पर्सनल डायरी बरामद की है.
AIIMS का अड़ंगा
इधर, एम्स पटना के मेडिकल बोर्ड ने शिकायत की है कि एसआईटी ने उन्हें अभी तक इलाज के पूरे कागजात और पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी नहीं दी है, जिसके बिना वे अंतिम राय नहीं दे पा रहे हैं.
क्या सीबीआई को सौंपा जाएगा केस?
घटना की गंभीरता और पुलिस की शुरुआती लापरवाही को देखते हुए बिहार सरकार पर भारी दबाव है. बिहार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमां खान ने हाल ही में बयान दिया है कि मामला बेहद गंभीर है और सरकार इस पर चर्चा कर रही है. यदि जरूरत पड़ी और निष्पक्ष जांच के लिए आवश्यक हुआ तो केस को सीबीआई को सौंपा जा सकता है. पूर्व मुख्यमंत्री और 'हम' संरक्षक जीतन राम मांझी ने भी सीबीआई जांच की मांग का समर्थन किया है. विपक्ष के साथ-साथ जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने भी पीड़िता के परिवार से मुलाकात की और सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं. पूर्व आईपीएस अमिताभ दास ने भी कहा है कि नीट छात्रा की जांच बिहार पुलिस की औकात की बात नहीं है.
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राजनीतिक और सामाजिक आक्रोश इस घटना को लेकर बिहार की राजनीति उबल रही है. कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने पटना के इनकम टैक्स चौराहे पर मुख्यमंत्री का पुतला फूंका है. छात्र संगठनों का कहना है कि जब राजधानी के पॉश इलाके में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं, तो पूरे प्रदेश का क्या हाल होगा? परिवार का आरोप है कि एक निजी अस्पताल के डॉक्टर भी इस मामले को दबाने में शामिल थे, जिन्होंने शुरुआती इलाज के दौरान साक्ष्य मिटाने की कोशिश की. फिलहाल, सबकी नजरें अब उस डीएनए मैच पर टिकी हैं. वह डीएनए ही बताएगा कि छात्रा ने आत्महत्या की थी या वह एक सोची-समझी साजिश और दरिंदगी का शिकार हुई. पटना पुलिस के लिए यह साख का सवाल बन गया है, क्योंकि 20 दिन बीत जाने के बाद भी मुख्य कातिल की पहचान सार्वजनिक नहीं हो पाई है.
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