अक्सर हम गेहूं की बुवाई और पहली-दूसरी सिंचाई के समय तो बहुत ध्यान देते हैं, लेकिन जैसे ही फसल 60-70 दिन की होती है और गबोट अवस्था (बालियां निकलने की अवस्था) में आती है, हम थोड़े लापरवाह हो जाते हैं। दोस्तो, यही वह समय है जब आप अपनी फसल की पैदावार को 20 से 25% तक बढ़ा सकते हैं। जो किसान एकड़ में 30-32 क्विंटल तक का उत्पादन लेते हैं, वे आखिरी समय तक अपनी फसल की सेवा करना नहीं छोड़ते।
अगर आपकी फसल इस समय गबोट अवस्था में है या बालियां निकल रही हैं, तो सबसे पहले सिंचाई के साथ कैल्शियम नाइट्रेट (10-15 किलो प्रति एकड़) और 1 किलो बोरोन (20%) का मिश्रण दें। बोरोन की कमी पहचानने का आसान तरीका यह है कि झंडा पत्ता (Flag Leaf) ऊपर से मुड़ा हुआ या उलझा हुआ दिखेगा। बोरोन डालने से पॉलिनेशन अच्छा होता है और बालियों में ऊपर तक दाने भरते हैं। साथ ही, NPK 0:52:34 का 1 किलो प्रति एकड़ के हिसाब से स्प्रे जरूर करें। इसमें मौजूद फास्फोरस और पोटाश दानों का साइज बढ़ाने, उनमें चमक लाने और पोषक तत्वों को बालियों तक पहुंचाने का काम करते हैं।
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उन किसान भाईयों के लिए जिनके गेहूं अभी 50-60 दिन के हैं और फसल में पीलापन दिख रहा है, एक जबरदस्त स्प्रे फार्मूला है—1 किलो यूरिया, आधा किलो जिंक सल्फेट (33%), 1 किलो मैग्नीशियम सल्फेट, आधा किलो मैंगनीज सल्फेट और आधा किलो फेरस सल्फेट। इन सबको 180-200 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करने से फसल में नई जान आ जाएगी। अगर आपकी फसल बहुत ज्यादा बढ़ रही है और गिरने का डर है, तो आप 2 ml प्रति लीटर के हिसाब से लियोसिन का भी उपयोग कर सकते हैं।
अंत में, अपनी फसल को पीला रतुआ (Yellow Rust) और अन्य फंगस बीमारियों से बचाने के लिए स्प्रे में टेबुकोनाजोल जैसा फंगीसाइड जरूर मिलाएं। इससे झंडा पत्ता हरा-भरा और स्वस्थ रहेगा, जिससे दाने मोटे और वजनदार बनेंगे। किसान भाईयों, गेहूं की खेती में आपकी मेहनत ही आपको मंडियों में टॉप क्वालिटी के रेट दिलाएगी। किसी भी जानकारी के लिए कमेंट जरूर करें और अपनी फसलों का ख्याल रखें।
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