भिण्डी के साथ लगाओ ये 4 सब्ज़ियाँ होगी चार गुना कमाई | मिश्रित खेती या इंटरक्रॉपिंग का मतलब एक ही खेत में एक से अधिक फसलें उगाना है। यह छोटे खेतों वाले किसानों के लिए बहुत फायदेमंद है क्योंकि इससे एक ही जमीन से तीन-चार अलग-अलग फसलों का उत्पादन लिया जा सकता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि यदि बाजार में किसी एक फसल के भाव कम भी हों, तो दूसरी फसल से अच्छी कमाई हो सके और नुकसान की संभावना कम हो जाए।
खेत की मेड़ का सही उपयोग करना अतिरिक्त कमाई का एक शानदार तरीका है। वीडियो में सुझाव दिया गया है कि खेत के चारों ओर की मेड़ों पर अलग-अलग बेल वाली फसलें लगानी चाहिए। पहली मेड़ पर करेला, दूसरी पर गिलकी, तीसरी पर लोबिया और चौथी पर लौकी उगाई जा सकती है। इससे खेत के बीच की मुख्य फसल के साथ-साथ मेड़ से भी अच्छी आमदनी होती है, जो कभी-कभी मुख्य फसल से भी अधिक हो सकती है।
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भिंडी की खेती के साथ इंटरक्रॉपिंग के कई प्रभावी तरीके बताए गए हैं। भिंडी के साथ गेंदा फूल उगाने से मिट्टी में निमेटोड की समस्या कम होती है और फसल पीली पड़ने से बचती है। इसके अलावा, भिंडी की लाइनों के बीच धनिया या पालक उगाया जा सकता है। धनिया 30-35 दिनों में तैयार हो जाता है, जिसे बेचकर किसान खेत की तैयारी और खाद का खर्च आसानी से निकाल सकते हैं, जबकि भिंडी की मुख्य फसल लंबे समय तक चलती रहती है।
मिर्च और शिमला मिर्च के साथ भी मिश्रित खेती करना लाभदायक है। डेढ़ फुट चौड़ी मेड़ के एक तरफ मिर्च लगाकर दूसरी तरफ खीरा या प्याज उगाया जा सकता है। प्याज को 35-40 दिनों में हरा प्याज बनाकर बेचा जा सकता है या उसे बड़ा होने के लिए छोड़ा जा सकता है। सिंचाई की नालियों के बीच खाली जगह में धनिया या मेथी की बुवाई की जा सकती है, जिससे जमीन के हर इंच का सही इस्तेमाल होता है।
सफल इंटरक्रॉपिंग के लिए सही फसलों का चुनाव, पौधों के बीच उचित दूरी और खरपतवार नियंत्रण बहुत जरूरी है। बुवाई के तुरंत बाद और पहली सिंचाई से पहले पेंडामेथिलिन का छिड़काव करने से खरपतवारों पर नियंत्रण पाया जा सकता है। यदि किसान इन वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर सही समय पर फसलों का प्रबंधन करते हैं, तो वे अपनी आय को चार गुना तक बढ़ा सकते हैं।
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