कोरिया : ग्राम पंचायत कटकोना इन दिनों भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। ग्राम पंचायत के ग्राम सचिव गणेश राजवाड़े का स्थानांतरण आदेश 03 नवम्बर 2025 को जारी हुआ था, लेकिन लगभग 90 दिन बीत जाने के बाद भी उन्होंने अपने नवीन पदस्थापन ग्राम पंचायत में अब तक पदभार ग्रहण नहीं किया है। यह स्थिति तब है, जब इसी अवधि में ग्राम पंचायत तलवापारा और भंडारपारा के ग्राम सचिवों ने अपने-अपने स्थानांतरण आदेश का पालन करते हुए नए पंचायत में कार्यभार संभाल लिया। इसके बावजूद कटकोना के ग्राम सचिव के खिलाफ कोई कार्रवाई न होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत कटकोना में 15वें वित्त आयोग की राशि से बीते एक वर्ष में लगभग 23 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। आरोप है कि इस राशि के व्यय में भारी अनियमितताएं की गई हैं। जिन व्यक्तियों और फर्मों के नाम से भुगतान दिखाया गया है, उनका जीएसटी पंजीकरण ही नहीं है। बिलों में जीएसटी नंबर तो अंकित किए गए हैं, लेकिन जांच में वे नंबर अमान्य पाए गए। ऐसे में स्पष्ट है कि शासन को लाखों रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाई गई है। इसके साथ ही मूलभूत सुविधाओं के लिए प्राप्त अन्य मदों की राशि के दुरुपयोग की भी आशंका जताई जा रही है। ग्राम पंचायत कटकोना को अब क्षेत्र में “भ्रष्टाचार का केंद्र” कहा जाने लगा है।
ये भी पढ़े : मुखिया के मुखारी -पक्ष -विपक्ष मस्त,छत्तीसगढ़िया पस्त है
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में विकास कार्यों की गुणवत्ता बेहद खराब है, जबकि कागजों में लाखों रुपये के कार्य दिखाए गए हैं। सड़क, नाली, भवन मरम्मत और अन्य बुनियादी कार्यों में खर्च की गई राशि का वास्तविक लाभ गांव को नहीं मिल पाया है। यह पहला मौका नहीं है जब ग्राम सचिव गणेश राजवाड़े विवादों में घिरे हों। इससे पहले भी उनके खिलाफ जिला पंचायत और कलेक्टर कार्यालय में शासकीय दस्तावेजों से छेड़छाड़ की शिकायत दर्ज की गई थी। उस मामले में जांच के बाद उन्हें दोषी पाया गया था और जिला प्रशासन द्वारा कार्रवाई भी की गई थी।
इसके बावजूद वर्तमान में उनके खिलाफ जनपद पंचायत स्तर पर किसी प्रकार की कठोर कार्रवाई नहीं होना कई सवालों को जन्म देता है। सूत्रों का दावा है कि ग्राम सचिव को जनपद पंचायत अधिकारी का संरक्षण प्राप्त है। बताया जाता है कि जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिए थे कि जो अधिकारी या कर्मचारी स्थानांतरण आदेश का पालन नहीं कर रहे हैं, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। बावजूद इसके, जनपद पंचायत अधिकारी द्वारा न तो स्थानांतरण आदेश का पालन कराया गया और न ही अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई। इसे उच्च अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना के रूप में देखा जा रहा है। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि राजनीतिक संरक्षण के चलते ग्राम सचिव के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पा रही है। ग्रामीणों और सूत्रों का कहना है कि मंत्री और विधायक के करीबी होने के कारण जनपद पंचायत अधिकारी भी कार्रवाई से बचते नजर आ रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन प्रशासन की निष्क्रियता संदेह को और गहरा कर रही है।
इतना ही नहीं, ग्राम पंचायत कटकोना में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए गए कई आवासों में भी भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। शिकायतों के बावजूद अब तक न तो समुचित जांच कराई गई और न ही दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि आवास निर्माण में गुणवत्ता से समझौता किया गया, लाभार्थियों से अवैध वसूली की गई और कागजों में कार्य पूर्ण दिखा दिया गया।
बताया जा रहा है कि गणेश राजवाड़े के खिलाफ दर्जनों शिकायतें विभिन्न स्तरों पर लंबित हैं, लेकिन हर बार मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो पंचायत व्यवस्था पर से लोगों का विश्वास पूरी तरह खत्म हो जाएगा।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन इस मामले में हस्तक्षेप कर जनपद पंचायत अधिकारी और ग्राम सचिव के खिलाफ कार्रवाई करेगा, या फिर कटकोना ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार का यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा। ग्रामीणों की नजरें जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
.jpeg)
.jpeg)
.jpeg)

Comments