नई दिल्ली : कक्षा 12वीं में कॉमर्स स्ट्रीम से पढ़ने वाले छात्रों के मन में अक्सर यह सवाल आता है कि उन्हें 12वीं के बाद सीए करना चाहिए या सीएस। अपने करियर को एक नई दिशा देने के लिए खुद से यह सवाल पूछना बेहद जरूरी है। लेकिन कई छात्र ऐसा मानते हैं कि जो लोग सीए नहीं बन पाते हैं। वे ही सीएस की पढ़ाई करते हैं। क्या वाकई ऐसा होता है?
बता दें, सीएस उन लोगों के लिए एक बेहतरीन प्रोफेशन है, जिन्हें कानून एवं प्रशासनिक क्षेत्रों में दिलचस्पी होती है। वहीं सीए उन लोगों के लिए है, जो बिजनेस और फाइनेंस क्षेत्र में रुचि रखते हैं। अब अगर आप सीएस और सीए में अंतर समझ गए हैं और सीएस की ओर रुख करना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए उपयोगी हो सकता है।
आज जिस तरह कॉरपोरेट सेक्टर का विकास हो रहा है। उसी तरह कंपनी को कानूनन तरीके से चलाने के लिए जॉब मार्केट में कुशल कंपनी सेक्रेटरी पेशेवरों की डिमांड भी बढ़ रही है। इस क्षेत्र में अच्छी सैलरी के साथ-साथ करियर में स्थिरता और अवसरों की कमी नहीं है। इसलिए इस लेख के जरिए हम आपको बताएंगे कि आप इस क्षेत्र में कैसे एक बेहतरीन करियर बना सकते हैं।
कहां से हुई कंपनी सेक्रेटरी की शुरुआत
एक कुशल कंपनी सेक्रेटरी की यह जिम्मेदारी होती है कि वह यह देखे कंपनी मनमाने तरीकों से नहीं, बल्कि नियम-कायदों के अनुरूप ही कार्य करें। कंपनी को कानूनन रूप से चलाने के लिए साल 1980 में भारत सरकार ने कंपनी सेक्रेटरी एक्ट पारित किया था, जिसके तहत ही कंपनी सेक्रेटरी कोर्स को बनाया गया। कंपनी सेक्रेटरी पेशेवरों की जरूरत उन कंपनियों में होती है, जिसका पेड अप-शेयर कैपिटल 10 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा होता है। उस कंपनी के लिए कंपनी सेक्रेटरी पेशेवर को नियुक्त करना अनिवार्य होता है।
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इन पेशवरों की जिम्मेदारी क्या है
एक कंपनी सेक्रेटरी क्वालीफाइड प्रोफेशनल होते हैं, जो कंपनी के वित्तीय मुद्दों पर अपनी राय देते हैं। साथ ही एक कंपनी सेक्रेटरी की यह भी जिम्मेदारी होती है कि वह सुनिश्चित करें कि कंपनी भारत द्वारा बनाए गए कानून के तहत काम कर रही है या नहीं। ये पेशेवर कंपनी को बेहतर वित्तीय राय देने के साथ-साथ कंपनी के कानूनी और प्रशासनिक कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कहां होती है पढ़ाई
कंपनी सेक्रेटरी बनने के लिए आपको किसी कॉलेज में एडमिशन नहीं लेना है, बल्कि आपको खुद को इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया (ICSI) में एनरोल करना होता है। साथ ही आईसीएसआई के तहत ही सीएस के सभी पेपर भी आयोजित कराएं जाते हैं।
12वीं के बाद कैसे बनें कंपनी सेक्रेटरी
अगर आप कॉमर्स स्ट्रीम से पढ़ाई कर रहे हैं और 12वीं के बाद सीएस की पढ़ाई करना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको कक्षा 12वीं न्यूनतम 40 प्रतिशत अंकों के साथ पास करनी होगी। कक्षा 12वीं के बाद सीएस की पढ़ाई करने के लिए आपको तीन फेज सीएस एग्जीक्यूटिव एंट्रेंस टेस्ट (CSEET), एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम और प्रोफेशनल प्रोग्राम को पास करना होगा।
ग्रेजुएशन के बाद एक कोर्स में छूट
जिन छात्रों ने अपनी ग्रेजुएशन पूरी कर ली है, उन्हें सीएस एग्जीक्यूटिव एंट्रेंस टेस्ट (CSEET) में एनरोल होने की जरूरत नहीं होती है। ग्रेजुएट पास छात्र सीधा एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम के लिए अप्लाई कर सकते हैं।
कोर्स का स्वरूप
आईसीएसआई की अधिसूचना के मुताबिक सीएस एग्जीक्यूटिव एंट्रेंस टेस्ट में कुल चार पेपर होते हैं। इन चारों पेपर को पास करने के बाद एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम के लिए अप्लाई करना होता है। इसके साथ ही एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम और प्रोफेशनल प्रोग्राम में सात-सात पेपर होते हैं। बता दें, सीएस एग्जीक्यूटिव एंट्रेंस टेस्ट साल में तीन बार फरवरी, जून और अक्टूबर माह में आयोजित कराया जाता है।
आर्टिकलशिप करना जरूरी
परीक्षा को पास करने के बाद सभी छात्रों को एग्जीक्यूटिव डिवेलपमेंट प्रोग्राम पूरा करना अनिवार्य है। यह एक महीने की ट्रेनिंग होती है, जो आईसीएसआई द्वारा ही संचालित की जाती है। इसके साथ ही सीएस एग्जीक्यूटिव की परीक्षा पास करने के बाद छात्रों को 21 महीने की आर्टिकलशिप करना भी जरूरी होता है। बता दें, यदि कोई छात्र आर्टिकलशिप पूरा नहीं करता है, तो उसे सीएस के लिए क्वॉलिफाइड नहीं माना जाएगा।
अब आर्टिकलशिप और प्रोफेशनल प्रोग्राम को पूरा करने के बाद छात्रों को आखिरी बार कॉरपोरेट लर्निंग डेवलपमेंट प्रोग्राम (CLDP) ट्रेनिंग को भी पूरा करना होता है। यह ट्रेनिंग एक महीने के लिए आयोजित कराई जाती है।
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