कवर्धा- 02/02/2026 : यह कहानी है विकासखण्ड कवर्धा के ग्राम पंचायत चरडोंगरी की जहां गौ पालक श्री लोमेश साहू पिता तुकाराम को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत पक्का पशुशेड बनाये जाने की। हितग्राही लोमेश साहू एक कृषक और गौ पालक है जिसका जीवन कृषि पर निर्भर है। कृषि कार्य में गौ धन महत्वपूर्ण है जिसके लिए लोमेश को पक्के पशु शेड की आवश्यकता थी जिसे महात्मा गांधी नरेगा योजना से पूरा किया गया।
पशु शेड नही होने पर समस्या।
लोमेश साहू के पास पशुधन है जिनके लिए पूर्व में कच्चा आश्रय था, जिसमें साफ सफाई की प्रमुख समस्या बनी रहती थी। कच्चा फर्श होने के कारण गोबर एवं गौमूत्र के प्रबंधन में समस्या होती थी जिससे कारण गंदगी अधिक होने लगता था। प्रमुख रूप से वर्षा के दिनों में पशुओं को खुले में रखने की चुनौती बनी रहती थी, अचानक बारिस हो जाने से गोधन को बचाना बड़ी समस्या रही। पशु शेड निर्माण कार्य में हितग्राही को ग्राम पंचायत का पूर्ण सहयोग रहा जिससे उन्हें किसी भी प्रकार से समस्या का सामना नहीं करना पड़ा और काम स्वकृत हो गया।
पशु शेड का निर्माण।
पक्का पशु शेड 53 हजार रूपये की लागत से महात्मा गांधी नरेगा योजना से स्वीकृत हुआ। स्वंय के पशु शेड निर्माण कार्य के लिए हितग्राही लोमेश साहू को 4919 रूपये का मजदूरी राशि प्राप्त हुआ जो उनके बैंक खाते में गया।निमार्ण कार्य में कुल 36 मानव दिवस का रोजगार सृजन हुआ। ग्राम पंचायत के सहयोग से पक्का पशु शेड बनकर तैयार हो गया है।
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कार्य के सुखद परिणाम !
कृषि एवं दूध का व्यवसाय साथ- साथ चल रहा है। दूध व्यवसाय को और आगे बढ़ाने के लिए मद्दद की आवश्यकता थी।लेकिन संसाधनों की कमी के कारण रूकावट आ रही थी। मनरेगा योजना से पक्का पशु शेड बन जाने से अब गौवंश के रहने हेतु आश्रय मिला गया है जिससे अब वे कृषक कार्य के साथ-साथ दुध व्यवसाय अच्छे से कर रहें है।
प्रति महीने 40 से 45 हजार रुपए की आमदनी से जीवन हुआ खुशहाल: लोमेश साहू ।
गौ पालक लोमेश साहू ने अपने अनुभव को साझा करते हुए बताते है कि पशु शेड बनाने के पूर्व गोधन को सुरक्षित रखने की चिंता बनी रहती थी। पक्का शेड बनाने की इच्छा बहुत पहले से थी लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण यह काम नही हो पा रहा था। महात्मा गांधी नरेगा से पशु शेड स्वीकृत होने पर मेरी चिंताए और परेशानी खत्म हो गई है। पशु शेड से व्यवसाय को आगे बढ़ाने में सहायता मिल रही है। पशु शेड में 12 गाय एवं 2 भैस को स्वच्छता के साथ सुरक्षित रखने स्थान मिल गया है। गोधन से प्रतिदिन 50 से 60 लीटर दूध प्राप्त होता है जिसे 40 से 50 रूपये प्रति लीटर बिक जाता है। साफ-सफ़ाई के लिए लेबर, दवाई,चार आदि की व्यवस्था के बाद महीने में लगभग 40 हजार रूपये की आमदनी हो रहा है। मेरे परिवार में 5 सदस्य है।परिवार के भरण पोषण में पहले जैसी परेशानी नहीं रही और आर्थिक रूप से मैं तरक्की कर रहा हूं। दूध का व्यवसाय अच्छा चल रहा है क्योंकि पशु शेड के अभाव में गोधन की बीमारियों पर होने वाले खर्च बहुत कम हो गए हैं और व्यवसाय बढ़ने लगा है। गोधन से मिलने वाला गोबर जैविक खाद के रूप में मैं अपने खेतों में उपयोग कर रहा हूं क्योंकि शेड में गोबर उपलब्ध हो रहा है जबकि शेड के अभाव में गोबर अच्छे से नहीं मिल पता था। महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना ने मेरे परिवार को उत्साह उमंग और खुशियों से भर दिया है। मैं जीवन में अपने परिवार के साथ अब आगे बढ़ रहा हूं।
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