जल, बेलपत्र और फूलों के बिना बाबा की पूजा अधूरी मानी जाती है. इसी वजह से देवघर में फूलों की मांग साल भर बनी रहती है, और यही मांग किसानों के लिए कमाई का सुनहरा अवसर बन सकती है. देवघर और आसपास के इलाकों के किसान अगर पारंपरिक फसलों के साथ-साथ गेंदा फूल की खेती करें, तो उनकी आमदनी दोगुनी हो सकती है. गेंदा फूल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाली फसल है. खास बात यह है कि गेंदा फूल की खेती करने से मुख्य फसल को भी फायदा होता है. गेंदा फूल की गंध के कारण खेतों में कीट-पतंगे कम लगते हैं, जिससे कीटनाशक दवाओं पर खर्च भी घट जाता है.
गेंदा फूल की खेती किसी भी सामान्य किसान के लिए आसान है. इसे सब्जियों, अनाज या दलहन फसलों के साथ मेड़ पर या खाली जगह में लगाया जा सकता है. देवघर जैसे धार्मिक शहर में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है, खासकर सावन, महाशिवरात्रि, श्रावणी मेला और अन्य धार्मिक अवसरों पर. ऐसे समय में गेंदा फूल के दाम भी अच्छे मिलते हैं, जिससे किसान को सीधा फायदा होता है.
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क्या कहते हैं कृषि वैज्ञानिक
देवघर के कृषि वैज्ञानिक डॉ राजन ओझा ने संवाददाता से बातचीत करते हुए कहां कि किसानों को गेंदा फूल की वही किस्म चुननी चाहिए जो साल भर उपजाऊ रहे. लाल छोटा गेंदा फूल इस लिहाज से सबसे बेहतर माना जाता है. यह किस्म न तो ज्यादा बारिश से खराब होती है और न ही तेज धूप या ठंड से. इसकी पैदावार लगातार होती रहती है और फूल भी टिकाऊ होते हैं, जिससे बाजार में इसकी मांग ज्यादा रहती है. गेंदा फूल की खेती के लिए ज्यादा पानी या उर्वरक की आवश्यकता नहीं होती. सही समय पर निराई-गुड़ाई और हल्की सिंचाई से अच्छी फसल मिल जाती है. कटाई के बाद फूलों को स्थानीय बाजार, मंदिरों, फूल मंडियों और पूजा सामग्री बेचने वालों को आसानी से बेचा जा सकता है. देवघर में स्थानीय स्तर पर ही खपत ज्यादा होने के कारण परिवहन का खर्च भी न के बराबर रहता है.
गेंदा फूल की खेती से दोगुना मुनाफा कमा सकते हैं किसान
कुल मिलाकर, देवघर और आसपास के किसानों के लिए गेंदा फूल की खेती एक बेहतरीन विकल्प है. यह न सिर्फ अतिरिक्त आय का साधन है, बल्कि मुख्य फसल की सुरक्षा भी करता है. अगर किसान थोड़ी समझदारी और सही किस्म का चयन करें, तो गेंदा फूल की खेती उनके जीवन में खुशहाली और स्थायी आमदनी का रास्ता खोल सकती है.
इस विधि से करे गेंदा फूल की खेती
कृषि वैज्ञानिक राजन ओझा बताते हैं कि गेंदा की खेती कम लागत में तैयार होने वाली फसल है. इसकी खेती के लिए दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है, जिसमें जल निकासी की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए. सबसे पहले नर्सरी तैयार की जाती है. एक एकड़ खेत के लिए लगभग 800 से 1000 ग्राम बीज पर्याप्त होते हैं. 20 से 25 दिनों में पौधे रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं. किसानों के लिए देशी गेंदा फूल सबसे उत्तम होता है. रोपाई के 30 से 35 दिन बाद पिंचिंग करने से पौधों में अधिक शाखाएं निकलती हैं और ज्यादा फूल आते हैं. लगातार 2 से 3 महीने तक फूलों का उत्पादन होता है. एक एकड़ खेत से 80 से 100 क्विंटल तक गेंदा फूल का उत्पादन संभव है. बाजार में गेंदा फूल की हमेशा भारी मांग रहती है. मौसम के अनुसार गेंदा फूल का भाव 15 से 40 रुपये प्रति किलो तक मिलता है, जिससे किसान कम समय में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.
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