बलौदाबाजार : जिले के पलारी विकासखंड अंतर्गत ग्राम तमोरी में प्राथमिक शाला भवन की बदहाल स्थिति को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश शुक्रवार को उफान पर आ गया। स्कूल भवन की लंबे समय से लंबित मांग को लेकर जिला पंचायत सदस्य एवं ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष रवि बंजारे के नेतृत्व में ग्रामीणों ने एसआईआर (स्कूल निरीक्षण रिपोर्ट) की सुनवाई करने पहुंचे शिक्षा विभाग के अधिकारियों के दल को लगभग दो घंटे तक बंधक बनाए रखा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गांव के शासकीय प्राथमिक विद्यालय का भवन अत्यंत जर्जर और खतरनाक स्थिति में है। भवन की छत और दीवारों में दरारें हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है। इसी कारण कक्षा पहली से पांचवीं तक के बच्चों को आंगनबाड़ी के एक ही कमरे में बैठाकर पढ़ाई कराने की मजबूरी बनी हुई है। सीमित जगह में सभी कक्षाएं एक साथ संचालित होने से न तो बच्चों को उचित शैक्षणिक वातावरण मिल पा रहा है और न ही सुरक्षा सुनिश्चित हो पा रही है।
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इन्हीं समस्याओं को लेकर जब शिक्षा विभाग के अधिकारी गांव पहुंचे, तो ग्रामीणों ने उन्हें जर्जर स्कूल भवन के भीतर रोक लिया और बाहर से ताला लगा दिया। करीब दो घंटे तक अधिकारी दल भवन के अंदर ही रहा। इस दौरान ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक उन्हें नए स्कूल भवन निर्माण को लेकर ठोस और लिखित आश्वासन नहीं दिया जाएगा, तब तक अधिकारियों को छोड़ा नहीं जाएगा।इस दल में जनपद पंचायत के अधिकारी डीओएम के कुंजर, सहायक अभियंता गुलशन कुमार गायकवाड़, दो शिक्षक तथा एक रोजगार सहायक शामिल थे। अधिकारियों के साथ मौजूद कर्मचारियों को भी ग्रामीणों ने घेर लिया और अपनी नाराजगी जाहिर की।
ग्रामीणों का कहना था कि उन्होंने कई बार प्रशासन और शिक्षा विभाग को भवन की जर्जर स्थिति से अवगत कराया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। हाल ही में संजय गुहे द्वारा भी स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों को स्पष्ट रूप से बताया गया था कि वर्तमान स्कूल भवन अत्यंत कमजोर हो चुका है और बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है।स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा अप्रैल माह में नया स्कूल भवन निर्माण शुरू कराने का स्पष्ट आश्वासन दिया गया। इसके बाद ही ग्रामीणों ने अधिकारियों को बाहर जाने दिया। हालांकि इस दौरान माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण बना रहा।
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय पर भवन निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हुआ, तो वे पुनः आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।यह घटना एक बार फिर ग्रामीण अंचलों में शिक्षा व्यवस्था और बुनियादी ढांचे की बदहाली को उजागर करती है, जहां नौनिहालों को आज भी सुरक्षित स्कूल भवन के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
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