फरवरी का महीना गार्डनिंग के लिए है बेस्ट, इन 6 सब्जियों से मिलेगा जबरदस्त फलन

फरवरी का महीना गार्डनिंग के लिए है बेस्ट, इन 6 सब्जियों से मिलेगा जबरदस्त फलन

फरवरी का महीना गार्डनिंग के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है क्योंकि मौसम न ज्यादा ठंडा है, न ज्यादा गर्म. इस समय सब्ज़ियों के बीज आसानी से अंकुरित हो जाते हैं. शिमला मिर्च, पालक, फूल गोभी, टमाटर, धनिया और बैंगन जैसी सब्ज़ियों को घर पर बालकनी, छत या आंगन में गमलों और ग्रो बैग में उगाया जा सकता है. सही मिट्टी, पर्याप्त धूप, नियमित पानी और जैविक खाद का इस्तेमाल पौधों को स्वस्थ और तेजी से बढ़ने में मदद करता है.

फरवरी का महीना गार्डनिंग के शौकीनों के लिए बेहद खास माना जाता है. ठंड धीरे-धीरे कम होने लगती है और मौसम न ज्यादा गर्म होता है, न ज्यादा सर्द. यही वजह है कि इस समय सब्ज़ियों के बीज आसानी से अंकुरित हो जाते हैं. घर पर ताज़ी और ऑर्गेनिक सब्ज़ियां उगाने के लिए फरवरी में शुरुआत करना सबसे सही समय है. आप इस महीने में टमाटर, मटर, पालक, हरी मिर्च और गाजर जैसे बीज बो सकते हैं. उचित देखभाल और पानी देने से घर पर पौष्टिक और ताज़ी सब्ज़ियां उगाना आसान हो जाएगा.

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इस मौसम में शिमला मिर्च, फूल गोभी, पालक, टमाटर, धनिया और बैंगन जैसी सब्ज़ियां आसानी से उगाई जा सकती हैं. खास बात यह है कि इन्हें उगाने के लिए न ज्यादा जगह की जरूरत होती है और न ही किसी खास तकनीक की. आप इन्हें बालकनी, छत या आंगन में गमलों और ग्रो बैग की मदद से बड़ी आसानी से उगा सकते हैं. नियमित पानी देना, पर्याप्त धूप और समय-समय पर खाद देना इन्हें स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है. इससे घर पर ताज़ी और पौष्टिक सब्ज़ियां उगाना सरल और लाभकारी हो जाता है.

सब्ज़ियों की अच्छी ग्रोथ के लिए सबसे जरूरी है सही मिट्टी. इसके लिए 60 प्रतिशत सामान्य मिट्टी, 30 प्रतिशत गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट और 10 प्रतिशत रेत (बालू) लें. इन तीनों को अच्छी तरह मिलाकर हल्का और उपजाऊ मिश्रण तैयार करें. इससे मिट्टी में पोषक तत्व और जलधारण क्षमता सही रहती है, जिससे पौधे स्वस्थ और तेज़ी से बढ़ते हैं. तैयार मिश्रण को अलग-अलग गमलों या ग्रो बैग में भर दें. इस तरीके से घर पर उगाई जा रही सब्ज़ियों की पैदावार बढ़ती है और पौधे लंबे समय तक ताज़गी बनाए रखते हैं.

अब बीज बोने की प्रक्रिया शुरू करें. तैयार मिट्टी में सब्ज़ियों के बीज हल्के हाथ से बिखेरें, लेकिन ध्यान रखें कि बीज बहुत पास-पास न हों. इससे पौधों को पर्याप्त जगह मिलती है और बढ़ने में आसानी होती है. इसके बाद बीजों को मिट्टी की एक पतली परत से ढक दें. यह परत बीजों को नमी बनाए रखने और सही तापमान देने में मदद करती है, जो अंकुरण के लिए आवश्यक है. नियमित रूप से हल्का पानी दें और मिट्टी को बहुत अधिक गीला न होने दें. इस प्रक्रिया से बीज जल्दी अंकुरित होकर मजबूत पौधे बनते हैं.

बीज बोने के बाद पानी देना बेहद अहम होता है. मिट्टी में हल्की नमी बनी रहे, इसका खास ध्यान रखें. पानी डालते समय तेज धार से बचें, ताकि बीज अपनी जगह से हिल न जाएं और अंकुरण प्रभावित न हो. इसके लिए स्प्रे बोतल या हल्की बूंदों वाला लोटा इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके बाद गमलों या ग्रो बैग को ऐसी जगह रखें, जहां सुबह की 3 से 4 घंटे की हल्की धूप आती हो. पर्याप्त धूप और नमी बीजों के जल्दी अंकुरित होने और मजबूत पौधे बनने के लिए जरूरी हैं.

लगभग 7 से 10 दिन में बीज अंकुरित होने लगते हैं और छोटे-छोटे पौधे दिखाई देने लगते हैं. जब पौधे थोड़े बड़े और मजबूत हो जाएं, तो उन्हें जरूरत के अनुसार अलग गमलों या बड़े ग्रो बैग में शिफ्ट किया जा सकता है. समय-समय पर जैविक खाद डालते रहें ताकि मिट्टी में पोषक तत्व पर्याप्त रहें और पौधों की बढ़वार बेहतर हो. कीटों और बीमारी से बचाव के लिए नीम का घोल या प्राकृतिक कीटनाशक का इस्तेमाल करें. नियमित पानी और धूप देने से पौधे स्वस्थ, हरे-भरे और जल्दी फल देने वाले बनते हैं.










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