देसी कद्दू की डिमांड गर्मियों में खूब रहती है. इसकी अगेती खेती के लिए फरवरी का महीना सबसे उपयुक्त माना जाता है. इस समय बुवाई से फसल जल्दी तैयार होती है. लोकल 18 से बात करते हुए जिला कृषि रक्षा अधिकारी विजय कुमार बताते हैं कि कद्दू उगाने के लिए किसान भाई उन्नत किस्मों का ही चयन करें. एक किस्म ऐसी है जिसके कद्दू का सामान्य वजन 1 किलो तक होता है. रंग और हल्के वजन के चलते इसकी मांग बहुत अधिक है. काशी उज्ज्वल कद्दू की किस्म उत्तर और दक्षिण भारत के किसानों के बीच काफी प्रसिद्ध है. इसके हर पेड़ से चार से पांच फल निकल आते हैं. करीब 110 दिनों में पककर तैयार हो जाती है.
कद्दू की फसल कम समय और कम लागत में किसानों को अच्छा मुनाफा देकर जाती है. बेल वाली सब्जियों में कद्दू को सबसे अगेती फसल माना जाता है, जिससे यह बाजार में जल्दी पहुंच जाती है और किसानों को बेहतर दाम मिलते हैं. इसकी अगेती खेती के लिए फरवरी का महीना सबसे उपयुक्त माना जाता है. इस समय बुवाई से फसल जल्दी तैयार होती है.
कृषि रक्षा अधिकारी विजय कुमार बताते हैं कि हमारे यहां गर्मियों में हरी सब्जियों की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. कुछ सब्जियां ऐसी हैं जिसे किसान सीजन के हिसाब से उगाते हैं. ऐसी ही एक फसल है देसी कद्दू, जिसकी अगेती खेती के लिए उन्नत किस्मों का चयन कर सकते हैं.
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कद्दू की बेहद खूबसूरत और नामचीन किस्मों में अरका सूर्यमुखी प्रमुख है. ऊपरी हिस्से में इसका आकार गोल होता है, लेकिन निचला हिस्सा थोड़ा टेढ़ा-मेढ़ा सा होता है. इसका रंग हर किसी को मोह लेता है. कद्दू की यह किस्म संतरे रंग की होती है. इस कद्दू का सामान्य वजन 1 किलो तक होता है. रंग और हल्के वजन के चलते इसकी मांग बहुत अधिक होती है.
पूसा विश्वास कद्दू की किस्म प्रति हेक्टेयर 400 क्विंटल तक उत्पादन देती है. इसके फल का रंग हरा होता है, जिस पर सफ़ेद रंग के हल्के धब्बे होते हैं. पूसा विश्वास की फसल 120 दिन के अंदर पककर तैयार हो जाती है.
काशी उज्ज्वल कद्दू की किस्म उत्तर और दक्षिण भारत के किसानों के बीच काफी प्रसिद्ध है. इसकी उत्पादक क्षमता काफी अच्छी है, क्योंकि इसके हर एक पेड़ से चार से पांच फल प्राप्त हो जाते हैं, लेकिन इसे पकने में दूसरी किस्मों से थोड़ा ज़्यादा समय लगता है. यह लगभग 110 दिनों में पककर तैयार हो जाती है.
नरेंद्र आभूषण किस्म के कद्दू का मध्यम गोल आकार होता है, जिस पर गहरे हरे रंग के दाग होते हैं. इस किस्म के फल पकने के बाद नारंगी रंग के हो जाते हैं, जिन्हें उगाकर प्रति हेक्टेयर खेत में 400 क्विंटल तक उत्पादन ले सकते हैं.
काशी हरित किस्म कद्दू की टॉप वैरायटी है. इसका रंग हरा, आकार चपटा और गोलाकार होता है. बुवाई के 50 से 60 दिनों की भीतर ही यह किस्म पककर तैयार हो जाती है. इसका फल 3.5 किलो से पांच किलो तक के बीच होता है. इसके एक ही पौधे से चार से पांच फल मिल जाते हैं. प्रति हेक्टेयर 400 क्विंटल तक का उत्पादन हो जाता है.
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