फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को शबरी जयंती मनाई जाती है। यह दिन भक्ति, प्रतीक्षा और विश्वास की उस पराकाष्ठा का प्रतीक है, जब एक भक्त की निस्वार्थ भक्ति ने स्वयं भगवान राम को उसके द्वार तक आने पर विवश कर दिया था। इस साल शबरी जयंती 9 फरवरी यानी आज के दिन मनाई जा रही है। माता शबरी की भक्ति की सबसे बड़ी सीख यह है कि भगवान जाति, रंग या कुल नहीं, बल्कि केवल प्रेम और भाव देखते हैं। आइए आज के शुभ दिन पर प्रभु राम, माता सीता और भक्त शबरी माता की आरती कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं, जो इस प्रकार हैं -
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।।भगवान राम की आरती।।
श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारुणम्।
नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।।
कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्।
पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्।।
भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।
रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्।।
सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं।
आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणं।।
इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
मम ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्।।
मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों।
करुना निधान सुजान सिलू सनेहू जानत रावरो।।
एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली।
तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली।।
दोहा- जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।
मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे।।
।।मां सीता आरती।।
आरती श्री जनक दुलारी की ।
सीता जी रघुवर प्यारी की ॥
जगत जननी जग की विस्तारिणी,
नित्य सत्य साकेत विहारिणी,
परम दयामयी दिनोधारिणी,
सीता मैया भक्तन हितकारी की ॥
आरती श्री जनक दुलारी की ।
सीता जी रघुवर प्यारी की ॥
सती श्रोमणि पति हित कारिणी,
पति सेवा वित्त वन वन चारिणी,
पति हित पति वियोग स्वीकारिणी,
त्याग धर्म मूर्ति धरी की ॥
आरती श्री जनक दुलारी की ।
सीता जी रघुवर प्यारी की ॥
विमल कीर्ति सब लोकन छाई,
नाम लेत पवन मति आई,
सुमीरात काटत कष्ट दुख दाई,
शरणागत जन भय हरी की ॥
आरती श्री जनक दुलारी की ।
सीता जी रघुवर प्यारी की ॥
।।देवी शबरी की आरती।।
ओम जय शबरी माता, मैया जय शबरी माता
सब जग की सुखदाता, सब जग की सुखदाता
सबकी भव त्राता, ओम जय शबरी माता ॥
राम जी की अगवानी, बन गए रूप रुद्र भवानी
मैया बन गई रुद्र भवानी, राम जी को बेर खिलाकर
राम जी से जोड़ा नाता, ओम जय शबरी माता ॥
कुटिया में प्रभु आएं, प्रेम से निशदिन गाएं
तुमड़ी में जल भर लाई, प्रभु को भूख मिटाई
मन की भक्ति लाती, ओम जय शबरी माता ॥
धन-धन शबरी बड़भागी, प्रभु तुम पर अनुराग
नवधा भक्ति पाकर, प्रभु राम में समाई
सुख की सरिता बहाती, ओम जय शबरी माता ॥
ओम जय शबरी माता, मैया जय शबरी माता
सब जग की सुखदाता, सब जग की सुखदाता
सबकी भव त्राता, ओम जय शबरी माता ॥
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