क्या आपकी आदतें लोगों को आपसे दूर कर रही हैं? इन संकेतों से पहचानें

क्या आपकी आदतें लोगों को आपसे दूर कर रही हैं? इन संकेतों से पहचानें

नई दिल्ली :  रिश्ते कांच की तरह नाजुक होते हैं और पौधे की तरह जीवित। उन्हें वक्त और देखभाल दोनों की जरूरत होती है। अक्सर हमें लगता है कि हमारे रिश्तों में जो दूरियां आ रही हैं, उसकी वजह सामने वाला है, लेकिन क्या आपने कभी ठहरकर सोचा है कि कहीं अनजाने में आपका बरताव ही तो उन्हें आपसे दूर नहीं कर रहा?

हम अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी में कई बार ऐसी गलतियां कर जाते हैं जिनका हमें एहसास भी नहीं होता, लेकिन सामने वाले का दिल चुपचाप टूटता रहता है। अगर आप अपने रिश्तों को बचाना और संवारना चाहते हैं, तो इन 5 संकेतों पर जरूर गौर करें।

बात करते वक्त मोबाइल में खोए रहना

आज के दौर की सबसे बड़ी बीमारी यही है। जब आपका कोई अपना (पार्टनर, बच्चे या माता-पिता) आपसे कुछ कह रहा हो और आपकी नजरें फोन की स्क्रीन पर हों, तो उन्हें लगता है कि उनकी बातें आपके लिए जरूरी नहीं हैं। यह आदत सामने वाले को 'अनदेखा' महसूस कराती है और धीरे-धीरे वे आपसे अपनी बातें शेयर करना बंद कर देते हैं।

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तारीफ कम और कमियां ज्यादा निकालना

क्या आपको याद है आखिरी बार आपने अपने किसी करीबी की दिल से तारीफ कब की थी? अगर आप हर बात में सिर्फ नुक्स निकालते हैं, "तुमने ये ठीक नहीं किया" या "तुमसे तो कुछ होता ही नहीं," तो सावधान हो जाइए। लगातार आलोचना किसी भी इंसान का आत्मविश्वास तोड़ देती है और वे उस इंसान से दूर भागने लगते हैं जो उन्हें हमेशा छोटा महसूस कराता है।

'मैं ही सही हूं' की जिद पकड़ना

बहस हर रिश्ते में होती है, यह सामान्य है। लेकिन झगड़े के बाद सुलह करना जरूरी है। अगर आप गलती होने पर भी माफी नहीं मांगते और हर हाल में खुद को सही साबित करने में लगे रहते हैं, तो यह खतरे की घंटी है। याद रखिए, बहस जीतकर आप अपना अहंकार तो संतुष्ट कर सकते हैं, लेकिन रिश्ता हार सकते हैं।

अपनों को 'फॉर ग्रांटेड' लेना

अक्सर हम ऑफिस के दोस्तों और पड़ोसियों से तो बहुत तमीज और मुस्कुराहट से मिलते हैं, लेकिन घर आते ही सारा तनाव अपने परिवार पर निकाल देते हैं। हम सोचते हैं, "ये तो अपने ही हैं, कहां जाएंगे?" यही सोच रिश्तों की मिठास खत्म कर देती है। अपने भी थक सकते हैं, उन्हें भी सम्मान और प्यार की उतनी ही जरूरत है जितनी किसी बाहरी को।

सुनने के बजाय सिर्फ सुनाना

एक अच्छा रिश्ता वह है जहां खामोशी भी समझी जाए और बातें भी सुनी जाएं। अगर आप सामने वाले को बोलने का मौका ही नहीं देते, उनकी बात बीच में काट देते हैं और सिर्फ अपनी राय थोपते हैं, तो वे आपके साथ घुटन महसूस करने लगेंगे। कम्युनिकेशन हमेशा दोतरफा होना चाहिए।

रिश्ते बनाना आसान है, लेकिन उन्हें ताउम्र निभाना एक कला है। अगर आपको इनमें से कोई भी संकेत अपने बरताव में नजर आता है, तो घबराएं नहीं। आज ही बदलाव की शुरुआत करें। एक छोटा-सा 'सॉरी', एक प्यार भरी 'तारीफ' और थोड़ा-सा 'वक्त' किसी भी बिगड़े रिश्ते को फिर से खूबसूरत बना सकता है।










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