रोहिणी व्रत फाल्गुन महीने में कब रखा जाएगा? जानें शुभ योग और पूजा विधि

रोहिणी व्रत फाल्गुन महीने में कब रखा जाएगा? जानें शुभ योग और पूजा विधि

सनातन धर्म में फाल्गुन महीने का खास महत्व है। यह महीना देवों के देव महादेव को समर्पित होता है। इस महीने में महाशिवरात्रि मनाई जाती है। महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की विशेष पूजा की जाती है। वहीं, हर महीने रोहिणी नक्षत्र पड़ने वाली तिथि पर रोहिणी व्रत मनाया जाता है। आइए, फाल्गुन महीने की रोहिणी व्रत की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और योग जानते हैं-

रोहिणी व्रत महत्व

रोहिणी व्रत भगवान वासुपूज्य स्वामी को समर्पित होता है। इस शुभ अवसर पर जैन धर्म के अनुयायी भक्ति भाव से भगवान वासुपूज्य की पूजा करते हैं। वहीं, जैन मंदिरों में विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। रोहिणी व्रत के दिन विवाहित महिलाएं और अविवाहित लड़कियां व्रत रखती हैं। इस व्रत को करने से साधक पर भगवान वासुपूज्य स्वामी की कृपा बरसती है। उनकी कृपा से हर मनोकामना पूरी होती है। साथ ही सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है।

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रोहिणी व्रत शुभ मुहूर्त

हिन्दू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि यानी 25 फरवरी को रोहिणी व्रत मनाया जाएगा। इस शुभ तिथि पर रोहिणी नक्षत्र का संयोग दोपहर 01 बजकर 38 मिनट तक है। साधक सुविधा अनुसार समय पर परमपूज्य भगवान वासु स्वामी की पूजा कर सकते हैं।

रोहिणी व्रत शुभ योग

फाल्गुन माह के रोहिणी व्रत पर सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का संयोग बन रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग दिन भर है। वहीं, रवि योग रात भर है। इन योग में भगवान वासु स्वामी की पूजा करने से सुख और सौभाग्य में वृद्धि होगी। साथ ही मनचाहा वरदान मिलेगा। इसके साथ ही रोहिणी व्रत पर शिववास योग का भी संयोग है। इस तिथि पर महादेव कैलाश पर मां पार्वती के साथ विराजमान रहेंगे।

पूजा विधि

साधक फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की नवनमी तिथि के दिन ब्रह्म बेला में उठें। इसके बाद घर की साफ-सफाई करें। अब नित्य कर्मों से निवृत होकर गंगाजल युक्त पानी से स्नान करें और आचमन कर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद नए कपड़े पहनें और सूर्य देव को जल का अर्घ्य दें। अब पंचोपचार कर भक्ति भाव से भगवान वासुपूज्य स्वामी की पूजा करें। भगवान वासुपूज्य स्वामी को फल, फूल आदि चीजें अर्पित करें। अंत में आरती कर सुख और समृद्धि की कामना करें।










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