8 फरवरी 2026 का दिन इतिहास के पन्नों में पाकिस्तान के खात्मे की शुरुआत के रूप में दर्ज होने जा रहा है. बलूच राष्ट्रवादियों ने वह कर दिखाया है जिसका डर इस्लामाबाद को दशकों से सता रहा था.बलूचिस्तान की आजादी का खाका, यानी उसका 'अंतरिम संविधान' आधिकारिक तौर पर दुनिया के सामने पेश कर दिया गया है. बलूच नेता मीर यार बलूच ने इस ऐतिहासिक दस्तावेज को शेयर किया है, जिसने रावलपिंडी के आर्मी हेडक्वार्टर में बैठे जनरल आसिम मुनीर और प्रधाानमंत्री शहबाज शरीफ की रातों की नींद उड़ा दी है. यह सिर्फ एक दस्तावेज नहीं, बल्कि जिन्ना के पाकिस्तान की कब्र पर आखिरी कील है.
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बलूचिस्तान लिबरेशन चार्टर की प्रस्तावना ही पाकिस्तान के लिए किसी काल चक्र से कम नहीं है. मीर यार बलूच के अनुसार, बलूचिस्तान की 6 करोड़ बहादुर माताओं, बहनों और बुजुर्गों ने आजादी की इस मशाल को जलाने के लिए लाखों बलिदान दिए हैं. यह संविधान उन लाखों शहीदों के खून से लिखा गया है जिन्हें पाकिस्तानी सेना ने गायब किया या प्रताड़ित किया. यह चार्टर दुनिया को एक स्पष्ट संदेश देता है कि बलूचिस्तान न तो पाकिस्तान है और न ही धार्मिक चरमपंथियों की पनाहगाह. यह एक धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य का ब्लूप्रिंट है, जो आधुनिक दुनिया के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने को तैयार है.
आसिम मुनीर और शहबाज के लिए आफत क्यों
Patriots, congratulations to all of you.
— Mir Yar Baloch (@miryar_baloch)February 8, 2026
✌✌⚖️⚖️📋💐
Balochistan's constitution is published: Let's initiate nationwide debate on Balochistan Liberation Charter
By: Mir Yar Baloch
8th February 2026https://t.co/IBe3N9VIYM
@hyrbair_marri @baluchistan_lc
The sixty million…pic.twitter.com/jj11OTyNHw
बलूचिस्तान के 'अंबेडकर' और 'मुजीब-उर-रहमान' हिरबयार मर्री
इस ऐतिहासिक दस्तावेज को तैयार करने का श्रेय बलूच राष्ट्रवादी नेता श्री हिरबयार मर्री को जाता है. उन्हें आधुनिक बलूचिस्तान का 'अंबेडकर' और 'शेख मुजीब-उर-रहमान' कहा जा रहा है. मर्री ने न केवल बलूच जनमानस को एक विजन दिया है, बल्कि अपने पूर्वजों की उस विरासत को आगे बढ़ाया है जिसने 18वीं सदी से ही ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन और अब पाकिस्तानी कब्जे के खिलाफ लड़ाई लड़ी है. हिरबयार मर्री ने इस चार्टर के माध्यम से बिखरे हुए बलूच समुदायों को एक समावेशी राष्ट्रीय दृष्टि के नीचे लाकर खड़ा कर दिया है.एकजुट बलूचिस्तान पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा खतरा है .
पाकिस्तान के लिए 'ब्लैकआउट' की स्थिति
अबु धाबी और खाड़ी देशों में रह रहे लाखों बलूचों के बीच इस चार्टर को अरबी में भी पहुंचाया गया है. अफगानिस्तान के साथ संबंधों को मजबूत करने के लिए इसे पश्तो और फारसी में भी लाया गया है. इसका मतलब है कि पाकिस्तान अब चारों तरफ से घिर चुका है. जब शहबाज शरीफ और जनरल मुनीर इस संविधान को पढ़ेंगे, तो उन्हें समझ आएगा कि अब बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों (सोना, गैस और तांबा) की लूट आसान नहीं होगी. बलूच अब अपने न्याय, संप्रभुता और सम्मान के लिए एक कानून के तहत संगठित हो चुके हैं.
एक नए उदय की आहट
बलूचिस्तान लिबरेशन चार्टर ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बलूचिस्तान अब एक 'भू-भाग' मात्र नहीं, बल्कि एक 'विचार' बन चुका है. पाकिस्तान की सेना और सत्ता कितनी भी दमनकारी नीतियां अपना ले, लेकिन जब किसी कौम का अपना संविधान आ जाता है, तो उसे देश बनने से कोई नहीं रोक सकता. आसिम मुनीर और शहबाज शरीफ के लिए चेतावनी साफ है कि बलूचिस्तान अब एक हकीकत है, और पाकिस्तान का नक्शा बदलने वाला है.
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