अब खेती की तस्वीर तेजी से बदल रही है. यहां के किसान अब पारंपरिक फसलों जैसे धान, गेहूं और सरसों के पुराने ढर्रे को छोड़कर साग-सब्जियों की आधुनिक खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं. हरी सब्जियों की खेती यहां के किसानों के लिए अब रोजाना मोटी कमाई का जरिया बन चुकी है. खासकर बैंगन और शिमला मिर्च जैसी फसलों ने तो किसानों की किस्मत ही बदल दी है. इन सब्जियों की मांग बाजार में 12 महीने बनी रहती है, यही वजह है कि बाराबंकी के कई किसान अब इनकी खेती को बड़े पैमाने पर अपना रहे हैं.
पारंपरिक फसलों को कहा अलविदा
जिले के बड़ेल गांव के रहने वाले युवा किसान आकाश उन प्रगतिशील किसानों में शामिल हैं, जिन्होंने समय के साथ खुद को बदला. आकाश पिछले कई सालों से शिमला मिर्च और बैंगन की खेती कर रहे हैं और इसमें उन्हें जबरदस्त कामयाबी मिली है. आकाश बताते हैं कि पहले वे भी दूसरे किसानों की तरह पारंपरिक फसलों जैसे धान, गेहूं और सरसों की खेती ही ज्यादा किया करते थे. लेकिन उनमें लागत और मेहनत के मुकाबले मुनाफा बहुत कम मिलता था. पिछले दो-तीन सालों से उन्होंने पूरी तरह सब्जियों पर ध्यान देना शुरू किया और आज इसका नतीजा उनके सामने है.
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कम लागत में तगड़ा मुनाफा
आकाश के मुताबिक, सब्जियों की खेती में अच्छी कमाई होती है. वे वर्तमान में करीब ढाई से तीन बीघे जमीन पर शिमला मिर्च और बैंगन उगा रहे हैं. लागत की बात करें तो एक बीघे में करीब 20 से 22 हजार रुपये का खर्च आता है. वहीं, जब फसल तैयार होकर बाजार में बिकती है, तो एक बीघे से करीब एक से डेढ़ लाख रुपये तक का मुनाफा आसानी से हो जाता है. आकाश बताते हैं कि इन फसलों की सबसे अच्छी बात यह है कि एक बार पौधा लगाने के बाद आपको तीन से चार महीने तक लगातार फसल मिलती रहती है.
हर मौसम में रहती है जबरदस्त डिमांड
सब्जियों की खेती में सफलता का सबसे बड़ा कारण उनकी बाजार में मांग है. शिमला मिर्च और बैंगन ऐसी सब्जियां हैं जिनकी जरूरत सर्दी हो या गर्मी, हर मौसम में रहती है. शादी-ब्याह के सीजन में तो इनकी कीमतें आसमान छूने लगती हैं, जिसका सीधा फायदा किसानों को मिलता है. आकाश कहते हैं कि धान-गेहूं की फसल साल में एक बार कटती है और पैसा भी एक बार मिलता है, लेकिन सब्जियां ऐसी फसल हैं जिनकी तुड़ाई करके आप हर दिन बाजार में बेच सकते हैं और रोजाना अपनी जेब में पैसा रख सकते हैं.
जानिए खेती की आसान तकनीक
आकाश ने बताया कि इसकी खेती करना बहुत मुश्किल नहीं है, बस थोड़ी सावधानी की जरूरत होती है. सबसे पहले इन सब्जियों की नर्सरी तैयार की जाती है. जब पौधे रोपाई के लायक हो जाते हैं, तब खेत की अच्छे से गहरी जुताई की जाती है. खेत तैयार करते समय उसमें गोबर की खाद और अन्य जरूरी पोषक तत्वों का छिड़काव किया जाता है. इसके बाद थोड़ी-थोड़ी दूरी पर पौधों को लगा दिया जाता है और तुरंत सिंचाई कर दी जाती है. रोपाई के महज 60 से 70 दिनों के बाद फसल तैयार हो जाती है और किसान इसकी तुड़ाई शुरू कर सकते हैं.
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