सपना था भारतीय फौज में जाकर देश की सेवा करना. दो बार दौड़ में भी शामिल हुए, लेकिन सफलता नहीं मिली. थक-हारकर खेती-किसानी से जुड़ गए. आज खेती में ऐसी पहचान बनाई कि सालाना 12 से 15 लाख रुपए की आमदनी कर रहे हैं. हम बात कर रहे हैं गया जिले के दुलरा गांव के रहने वाले मोहम्मद अरमान आलम की. अरमान आलम फिलहाल दो बीघा में रेड लेडी पपीता की खेती कर रहे हैं. इन्होंने पहली बार पपीता की खेती की है.
सबसे पहले इन्होंने टमाटर की खेती से शुरुआत की थी. जिस गांव से मोहम्मद अरमान ताल्लुक रखते हैं, वहां बड़े स्तर पर टमाटर की खेती होती है. गांव के चारों ओर टमाटर के खेत दिख जाएंगे और उसी के बीच एक-दो बीघे का प्लॉट है, जहां पपीता की खेती हो रही है.
टमाटर की खेती में अच्छा फायदा हुआ और आज भी टमाटर की खेती लगभग चार से पांच बीघा में करते हैं. कुछ अलग करने की सोच के कारण इन्होंने यूट्यूब से पपीता की खेती के बारे में जानकारी ली. यूट्यूब से सीखने के बाद इन्होंने पिछले साल मार्च महीने में रेड लेडी 786 वैरायटी के लगभग 1200 पौधे अपने खेतों में लगा दिए.
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पौधे लगाने के चार महीने बाद से ही फल आना शुरू हो गया. एक पपीते के पेड़ से लगभग 50-60 किलो फलन हुआ. इस प्रजाति के पपीते की डिमांड बाजार में अच्छी रहती है. इसकी कीमत भी अन्य पपीते की तुलना में अधिक मिलती है. अरमान 35 रुपये किलो के भाव से बोधगया के बाजार में आसानी से बेच रहे हैं.
पपीता को लगे एक साल होने को है और अभी तक अरमान 5 लाख रुपए का पपीता बेच चुके हैं और उम्मीद है कि 3 लाख रुपए के पपीते की बिक्री और होगी. अरमान ने बताया कि पपीता और टमाटर की खेती से सालाना 15 लाख रुपए तक की आमदनी हो जाती है.
इसमें टमाटर में लगभग 2 लाख रुपए की लागत, जबकि पपीता में डेढ़ लाख रुपए की लागत आई है. बेंगलुरु से इन्होंने रेड लेडी 786 वैरायटी का बीज मंगवाया था और 5 हजार रुपए में 10 ग्राम बीज मिला था.
बीज मंगवाने के बाद फरवरी महीने में घर की छत पर नर्सरी तैयार की और मार्च महीने में इसे खेतों में लगा दिया. इस वैरायटी की खासियत यह है कि इसका फलन अधिक होता है और फल जल्दी खराब भी नहीं होता. ठंड के मौसम में थोड़ा-बहुत फल बर्बाद होता है, लेकिन इसकी खेती से किसान अच्छी कमाई कर सकते हैं.
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