नई दिल्ली: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा 9 मार्च को होने की संभावना है। यह जानकारी समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से दी है।
यह घटनाक्रम तब सामने आया जब विपक्षी दलों ने ओम बिरला को लोकसभा अध्यक्ष पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सदन में स्पष्ट रूप से पक्षपात पूर्ण तरीके से काम किया जाता है, विपक्ष की प्रस्ताव के बाद ओम बिरला ने खुद को सदन की कार्यवाही से दूर कर लिया है।
विपक्ष ने स्पीकर पर लगाए आरोप
अपने प्रस्ताव पर विपक्ष ने अध्यक्ष पर लोकसभा में कुछ अप्रत्याशित कार्रवाई करने की बात करते हुए कांग्रेस सदस्यों के खिलाफ झूठे दावे करने का भी आरोप लगाया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राष्ट्रपति का भाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस का जवाब देने के लिए सदन में ना आने का अनुरोध भी शामिल है।
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क्या कहता है संविधान का अनुच्छेद 96?
संविधान का अनुच्छेद 94सी लोकसभा के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को हटाने के लिए प्रावधानों से संबंधित है। संविधान का अनुच्छेद 96 अध्यक्ष को सदन में अपना बचाव करने का अवसर देता है। सदन में अध्यक्ष को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव पेश किए जाने पर अध्यक्ष अपना मत डाल सकते हैं लेकिन बराबर होने की स्थिति में वह अपना मत नहीं डाल सकते।
लोकसभा में हंगामा
लोकसभा में 2 फरवरी से ही व्यवधान देखा जा रहा है, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी को अध्यक्ष द्वारा पूर्व सेवा प्रमुख एमएम नरवाने की किताब के अंश पर आधारित एक लेख को पढ़ने की अनुमति नहीं दी गई थी, जिसमें भारत-चीन संघर्ष का जिक्र था।
4 फरवरी को विपक्ष के हंगामा के कारण प्रधानमंत्री मोदी धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस का जवाब नहीं दे सके और प्रधानमंत्री के भाषण के बिना ही 5 फरवरी को धन्यवाद प्रस्ताव पारित कर दिया गया।
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