कुंभ संक्रांति पर बन रहें हैं कई दुर्लभ योग,ऐसे करें पूजा..खुल जाएंगे तरक्की के द्वार

कुंभ संक्रांति पर बन रहें हैं कई दुर्लभ योग,ऐसे करें पूजा..खुल जाएंगे तरक्की के द्वार

सनातन धर्म में संक्रांति का खास महत्व है। यह पर्व हर महीने सूर्य देव के राशि परिवर्तन करने की तिथि पर मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर गंगा स्नान कर पूजा, जप-तप और दान-पुण्य किया जाता है। संक्रांति तिथि पर काले तिल करने से व्यक्ति विशेष की हर मनोकामना पूरी होती है।

ज्योतिष गणना अनुसार शुक्रवार 13 फरवरी को कुंभ संक्रांति है। इस शुभ अवसर पर शिववास योग समेत कई मंगलकारी शुभ योग बन रहे हैं। इन योग में सूर्य देव की पूजा करने से साधक को अक्षय फल मिलेगा। वहीं, कुंभ संक्रांति पर 52 मिनट का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है। आइए, इसके बारे में सबकुछ जानते हैं-

सूर्य गोचर (Surya Gochar 2026)

आत्मा के कारक सूर्य देव 13 फरवरी को राशि परिवर्तन करेंगे। इस दिन सूर्य देव सुबह 04 बजकर 14 मिनट पर मकर राशि से निकलकर कुंभ राशि में गोचर करेंगे। इस शुभ अवसर पर कुंभ संक्रांति मनाई जाएगी। कुंभ राशि में गोचर के दौरान सूर्य देव 19 फरवरी को शतभिषा और 04 मार्च को पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में गोचर करेंगे।

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शुभ योग (Falgun Amavasya Shubh Yoga)

ज्योतिषियों की मानें तो कुंभ संक्रांति (Kumbh Sankranti 2026) पर शिववास का संयोग दिन भर है। कुंभ संक्रांति के दिन दोपहर 02 बजकर 55 मिनट तक देवों के देव महादेव कैलाश पर जगत की देवी मां पार्वती के साथ रहेंगे। इसके बाद नंदी की सवारी करेंगे। इन योग में गंगा स्नान कर भगवान शिव और सूर्य देव की पूजा करने से साधक पर भगवान शिव की विशेष कृपा बरसेगी।

दुर्लभ मुहूर्त

कुंभ संक्रांति के दिन प्रातः काल में 52 मिनट का दुर्लभ संयोग है। यह संयोग ब्रह्म मुहूर्त का है। ब्रह्म मुहूर्त का संयोग सुबह 05 बजकर 18 मिनट से लेकर सुबह 06 बजकर 10 मिनट तक है। इस दौरान गंगा स्नान कर आत्मा के कारक सूर्य देव की पूजा करने से आरोग्यता का वरदान प्राप्त होगा। साथ ही सूर्य देव की कृपा से मनचाही मुराद पूरी होगी।










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