नई दिल्ली :12 फरवरी का दिन बांग्लादेश के इतिहास का बहुत ही महत्वपूर्ण दिन होने जा रहा है, क्योंकि इस दिन बांग्लादेश की आवाम अपनी नई सरकार चुनने जा रही है। जुलाई अगस्त 2024 के हिंसक आंदोलन में प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाने के बाद पहली बार देश में चुनाव होने जा रहे हैं। यह चुनाव न सिर्फ सत्ता परिवर्तन तक सीमित है, बल्कि बांग्लादेश के भविष्य को भी तय करने जा रहे हैं।मौजूदा स्थिति की बात करें तो तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी को शुरुआती बढ़त मानी जा रही है लेकिन जमात-ए-इस्लामी भी बड़ा उलटफेर कर सकती है, क्योंकि सर्वे में बीएनपी और जमात में कांटे की टक्कर दिखाई दे रही है।भारत की नजरें खास तौर पर इन परिणामों पर टिकी हुई है, क्योंकि संभावित सत्ता परिवर्तन भारत-बांग्लादेश संबंधों, सीमा सुरक्षा, पूर्वोत्तर की स्थिरता और क्षेत्रीय संतुलन पर असर डाल सकता है।
बांग्लादेश चुनाव पर भारत का रुख
भारतीय विदेश मंत्रालय का रवैया बांग्लादेश को लेकर साफ हो चुका है कि चुनाव में चाहे जिसकी भी सरकार आए वह उसके साथ संबंधों को आगे बढ़ाने को लेकर उस जज्बे के साथ काम करेंगे, जैसे पूर्व पीएम शेख हसीना के कार्यकाल में किया जा रहा था। बीएनपी और जमात के नेताओं के साथ होने वाली मुलाकातों के बारे में विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि अभी तक दोनों दलों के नेताओं की तरफ से ऐसा कोई संकेत नहीं आया कि वह भारत के साथ संबंधों की अहमियत को कमतर कर रहे हों।
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बांग्लादेश चुनाव पर भारत की नजर
बीएनपी की संभावित वापसी चीन और अमेरिका की बढ़ती सक्रियता तथा भारत के आर्थिक और सामरिक हित इन सब के बीच, ये चुनाव दक्षिण एशिया की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू कर सकता है। यही वजह है कि जिस बेसब्री से चुनाव का परिणाम का इंतजार बांग्लादेश की जनता को है, नई दिल्ली में भी उस काम नहीं है।
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