अरहर किसानों के लिए एक्सपर्ट के धांसू टिप्स! फसल में फूल आते समय न करें ये गलती

अरहर किसानों के लिए एक्सपर्ट के धांसू टिप्स! फसल में फूल आते समय न करें ये गलती

भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहां की लगभग 55% आबादी आज भी खेती-किसानी पर निर्भर है. किसान कई तरह की फसलें उगाते हैं, जिनमें से एक है अरहर की फसल इन दिनों ये दलहनी फसल अपने खास पड़ाव पर है. फरवरी के महीने में अरहर के पौधों में फूल आने लगते हैं, जो आगे चलकर फलियों और बीजों का रूप लेते हैं. कृषि विज्ञान केंद्र सुलतानपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सी.के. त्रिपाठी ने बताया कि इस समय किसानों को फसल की खास देखभाल करनी चाहिए ताकि पैदावार पर कोई बुरा असर न पड़े.

खेतों में नमी बरकरार रखना है सबसे जरूरी
डॉ. सी.के. त्रिपाठी के मुताबिक, किसान अक्सर सबसे बड़ी गलती सिंचाई को लेकर करते हैं. जब अरहर के पौधों में फूल आ रहे होते हैं और बीज बनने की प्रक्रिया शुरू होती है, तब पौधों को नमी की सख्त जरूरत होती है. अगर इस समय खेत सूख जाते हैं, तो फूल झड़ने लगते हैं और फलियों का विकास रुक जाता है. किसानों को सलाह दी जाती है कि फरवरी के महीने में खेत की हल्की सिंचाई जरूर करें. अगर बीज बनने तक पौधों को सही नमी मिलती रहे, तो पैदावार कई गुना बढ़ सकती है.

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फली भेदक कीट से रहें सावधान
अरहर की फसल के लिए इस समय सबसे बड़ा दुश्मन ‘फली भेदक’ कीट होता है. यह कीट पौधों की फलियों में छोटे-छोटे छेद कर देता है, जिससे अंदर के दाने पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं. अगर आपको अपनी फसल की फलियों में छेद दिखाई दें, तो समझ जाएं कि कीट ने हमला कर दिया है. इससे बचाव के लिए किसानों को फसल पर ‘नीम के तेल’ का छिड़काव करना चाहिए. यह एक सुरक्षित और प्रभावी तरीका है, जिससे कीटों पर नियंत्रण पाया जा सकता है.

रोगों के लक्षणों को न करें नजरअंदाज
पुष्पन यानी फूल आने की इस अवस्था में पौधों की निगरानी करना बहुत जरूरी है. डॉ. त्रिपाठी बताते हैं कि यदि फूलों के रंग में बदलाव दिखे या पौधों में किसी भी तरह के अप्रत्याशित (अजीब) लक्षण नजर आएं, तो तुरंत कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेनी चाहिए. समय पर रोगों की पहचान और सही उपचार ही फसल को सुरक्षित रखने का एकमात्र रास्ता है.

अगर किसान भाई सिंचाई, कीट नियंत्रण और समय पर देखभाल जैसी इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखते हैं, तो वे अपनी अरहर की फसल से शानदार मुनाफा कमा सकते हैं. सही समय पर किया गया प्रबंधन न केवल फसल को कीटों से बचाता है, बल्कि दानों की गुणवत्ता और वजन को भी बढ़ा देता है.










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