आज के तेज रफ्तार जीवन में माता-पिता बच्चों की जरूरतें पूरी करने में इतने बिजी हो जाते हैं कि इमोशनली उनके साथ रहना पीछे छूट जाता है। अच्छे स्कूल, बेहतर सुविधाएं और सुरक्षित भविष्य देना जरूरी है, लेकिन उतना ही जरूरी है कि बच्चा यह महसूस करे कि उसके माता-पिता भावनात्मक रूप से भी उसके साथ हैं।
इमोशनली प्रेजेंट होने का मतलब हर वक्त साथ रहना नहीं, बल्कि बच्चे की भावनाओं को समझना, स्वीकार करना और सही समय पर उसका साथ देना है। यह कोई एक दिन का काम नहीं, बल्कि रोजमर्रा के छोटे व्यवहारों का नतीजा है। जब बच्चा यह जान लेता है कि उसके माता-पिता उसे बिना शर्त समझते और स्वीकार करते हैं, तो वह न सिर्फ मानसिक रूप से मजबूत बनता है, बल्कि जीवन की चुनौतियों का सामना भी बेहतर तरीके से कर पाता है।
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कैसे रहें अपने बच्चे की जिंदगी में इमोशनली प्रेजेंट?
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