सोलर नल-जल योजना से कुमा गांव में पहुंच रहा हर घर स्वच्छ पेयजल, पानी के लिए घंटों कतार से मिली मुक्ति

सोलर नल-जल योजना से कुमा गांव में पहुंच रहा हर घर स्वच्छ पेयजल, पानी के लिए घंटों कतार से मिली मुक्ति

रायगढ़, 17 फरवरी 2026 : रायगढ़ के विकासखंड धरमजयगढ़ अंतर्गत स्थित ग्राम पंचायत कुमा आज ग्रामीण परिवर्तन की एक सशक्त मिसाल बनकर उभरा है। जिला मुख्यालय से लगभग 100 किलोमीटर दूर बसे इस गांव में कभी पानी की समस्या जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष थी। आज वही गांव जल जीवन मिशन के तहत स्थापित सोलर नल-जल योजना के माध्यम से आत्मनिर्भरता, स्वच्छता और समृद्धि की नई कहानी लिख रहा है।कुछ वर्ष पहले तक ग्राम कुमा में जल संकट सामान्य बात थी। महिलाएं सुबह से लेकर दोपहर तक हैंडपंपों के पास कतार में खड़ी दिखाई देती थीं। गर्मी के दिनों में जलस्तर गिरने से स्थिति और भी गंभीर हो जाती थी।

कई बार पानी के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता था। इस दैनिक संघर्ष ने महिलाओं का समय, श्रम और ऊर्जा छीन ली थी। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती थी और परिवार के स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर पड़ता था। गांव के जीवन की रफ्तार पानी की उपलब्धता पर निर्भर थी और यही सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई थी। परिवर्तन की यह कहानी तब शुरू हुई जब जल जीवन मिशन के अंतर्गत ग्राम कुमा में सौर ऊर्जा आधारित नल-जल प्रदाय प्रणाली स्थापित की गई। गांव में लगाए गए सोलर पैनलों से संचालित पंप के माध्यम से जल को ऊंची टंकी तक पहुंचाया जाता है और वहां से पाइपलाइन द्वारा प्रत्येक घर तक नियमित जल आपूर्ति की जाती है। यह व्यवस्था बिजली पर निर्भर नहीं है, इसलिए बिजली कटौती का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

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पर्यावरण के अनुकूल यह प्रणाली न्यूनतम रखरखाव में दीर्घकालिक समाधान प्रदान कर रही है।अब हर घर तक स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल पहुंच रहा है, जिससे गांव की जीवनशैली में स्थायी परिवर्तन आया है। ग्राम की हितग्राही श्रीमती देवमति बताती हैं कि पहले प्रतिदिन दो से तीन घंटे पानी लाने में व्यतीत हो जाते थे। उस समय वे न तो बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान दे पाती थीं और न ही स्वयं के विकास के लिए समय निकाल पाती थीं। अब घर पर ही नल से नियमित जल आपूर्ति होने से उनका जीवन पूरी तरह बदल गया है। वे अपने बच्चों की शिक्षा पर अधिक समय दे रही हैं, स्व-सहायता समूह की गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं और सामाजिक कार्यक्रमों में भी सहभागिता बढ़ी है। स्वच्छ पेयजल मिलने से परिवार का स्वास्थ्य बेहतर हुआ है और जलजनित बीमारियों में कमी आई है। देवमति गर्व से कहती हैं, अब हमें पानी के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ता। घर पर ही स्वच्छ पानी मिलने से हमारा जीवन सरल और सुरक्षित हो गया है।

पानी लाने की बाध्यता समाप्त होने से महिलाओं को समय की स्वतंत्रता मिली है। यह समय अब आयवर्धक गतिविधियों और सामाजिक भागीदारी में लगाया जा रहा है। महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे निर्णय प्रक्रिया में भी अधिक सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। यह परिवर्तन केवल सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सम्मान और आर्थिक सुदृढ़ता की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है। विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से बच्चों की उपस्थिति और स्वास्थ्य में सुधार देखा गया है। स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ी है और घरों में शौचालय उपयोग को भी प्रोत्साहन मिला है।

ग्राम स्तर पर जल प्रबंधन समिति का गठन किया गया है, जो इस प्रणाली के रखरखाव और निगरानी की जिम्मेदारी संभाल रही है। इससे ग्रामीणों में जिम्मेदारी और सामुदायिक सहभागिता की भावना विकसित हुई है। आज ग्राम कुमा केवल एक गांव नहीं, बल्कि प्रेरणा का प्रतीक है। यहां बहता स्वच्छ जल केवल प्यास नहीं बुझा रहा, बल्कि विकास, आत्मसम्मान और उज्ज्वल भविष्य की नई धारा प्रवाहित कर रहा है।










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