हम सभी अपनी लाइफ में कड़ी मेहनत करते हैं ताकि परिवार को हर सुख-सुविधा दे सकें। लेकिन, कई बार ऐसा होता है कि दिन-रात एक करने के बाद भी पैसा हाथ में नहीं टिकता या तरक्की के रास्ते बंद नजर आते हैं। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में इसे ऊर्जा का असंतुलन माना जाता है। अगर आप भी ऐसी स्थिति से गुजर रहे हैं, तो 'कुबेर यंत्र'(Kuber Yantra) आपके लिए एक चमत्कारिक समाधान साबित हो सकता है।
कौन हैं भगवान कुबेर?
भगवान कुबेर (Lord Kuber) को देवताओं का कोषाध्यक्ष यानी 'धन का राजा' माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, जहां लक्ष्मी जी (Laxmi Devi) सौभाग्य और समृद्धि देती। वहीं, कुबेर देव उस धन को सुरक्षित रखने और उसे बढ़ाने का आशीर्वाद देते हैं।
किस दिशा में रखें कुबेर यंत्र?
वास्तु शास्त्र में दिशाओं का बहुत महत्व है। पौराणिक ग्रंथों और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, उत्तर दिशा (North Direction) के स्वामी स्वयं भगवान कुबेर हैं। इसलिए, कुबेर यंत्र को हमेशा घर या ऑफिस की उत्तर दिशा में ही स्थापित करना चाहिए।
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वास्तु शास्त्र के अनुसार, उत्तर दिशा में जगह न हो, तो आप इसे ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में भी रख सकते हैं। इस दिशा को सबसे पवित्र माना जाता है और यहां से सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) का प्रवाह सबसे अधिक होता है।
सावधानियां जो हैं जरूरी
वास्तु के नियमों के अनुसार, कुबेर यंत्र को कभी भी गंदगी वाली जगह, स्टोर रूम या शौचालय के पास न रखें। इसे अंधेरे में रखने के बजाय ऐसी जगह रखें, जहां हल्की रोशनी आती हो। साथ ही, यंत्र को रोज धूप या अगरबत्ती दिखाना न भूलें ताकि उसकी ऊर्जा सक्रिय रहे।
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