कोलकाता : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में बांग्लादेश में संपन्न हुए संसदीय चुनावों को शांतिपूर्ण बताते हुए भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में जहां हिंसा की आशंका जताई जा रही थी, वहां चुनाव बेहद शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए, जबकि भारत में चुनाव आयोग "धमकी भरी संस्कृति" अपनाकर लोकतंत्र को कुचल रहा है।
ममता बनर्जी ने कहा कि देखिए बांग्लादेश ने कितने शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव कराए," जिससे विवाद खड़ा हो गया है। नबन्ना में मीडिया से बातचीत के दौरान ममता बनर्जी ने कहा कि देखिए बांग्लादेश ने कितने शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव कराए। सबको लग रहा था कि हिंसा होगी, लेकिन सब कुछ शांतिपूर्ण हुआ।"
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उन्होंने चुनाव आयोग को "तुगलकी आयोग" करार देते हुए आरोप लगाया कि यह एक राजनीतिक दल के इशारे पर काम कर रहा है और बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है। विशेष रूप से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और कुछ अधिकारियों के निलंबन पर उन्होंने सवाल उठाए।
ममता ने कहा कि सात अधिकारियों को निलंबित किया गया है, लेकिन उनका अपराध क्या है? अगर कोई गलती हुई भी तो राज्य सरकार को सूचित क्यों नहीं किया गया? उन्हें बचाव का मौका नहीं दिया गया। ये अधिकारी दिन-रात मेहनत करते हैं, मैं उन्हें जानती हूं। सरकार उन्हें सपोर्ट करेगी, वे बर्खास्त नहीं होंगे।"
इस बयान पर भाजपा ने तीव्र प्रतिक्रिया दी है। आसनसोल की भाजपा विधायक अग्निमित्रा पॉल ने कहा, "ममता बनर्जी बंगाल की सीमावर्ती सीटों पर जमात की जीत देखकर खुश हैं। बांग्लादेश चुनाव परिणामों से वे उत्साहित हैं क्योंकि वे जमात की दूसरी टीम का नेतृत्व कर रही हैं।" उन्होंने "तुगलकी आयोग" वाले बयान पर भी कटाक्ष किया और कहा कि अगर ममता असंतुष्ट हैं तो अदालत जा सकती हैं, लेकिन भारतीय चुनाव आयोग के खिलाफ ऐसे शब्दों का समर्थन नहीं किया जा सकता।
भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि एसआईआर एक ऐसी प्रक्रिया है जो नियमित अंतराल पर पूरी पारदर्शिता के साथ संचालित की जा रही है। तृणमूल अपनी हार को छिपाने के लिए घुसपैठियों का समर्थन कर रही है।"
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