चूड़ियां सिर्फ श्रृंगार का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति में इन्हें सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, अगर चूड़ियां सही तरीके से और सही नियमों के पालन के साथ पहनी जाएं, तो यह घर में सुख-समृद्धि लाती हैं। वहीं, इनसे जुड़ी छोटी सी चूक भी वास्तु दोष का कारण बन सकती है।
आइए जानें चूड़ियों से जुड़े कुछ जरूरी वास्तु नियम, जो आपके जीवन में खुशहाली ला सकते हैं।
चूड़ियां पहनने और रखने के जरूरी नियम
1. टूटी या चटक गई चूड़ियां
अक्सर हम थोड़ी सी चटक गई या दरार वाली चूड़ियों को "ठीक है" समझकर पहने रहते हैं। वास्तु के अनुसार, यह सबसे बड़ी गलती है। टूटी हुई चूड़ियां नकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं और पति-पत्नी के रिश्तों में तनाव पैदा कर सकती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसी चूड़ियां पहनना सौभाग्य के लिए शुभ नहीं माना जाता।
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2. चूड़ियों की खनक और दिशा
वास्तु शास्त्र के अनुसार, चूड़ियों की मधुर आवाज घर के वातावरण को शुद्ध करती है। चूड़ियों को हमेशा व्यवस्थित तरीके से रखना चाहिए। इन्हें कभी भी इधर-उधर बिखेर कर न रखें। शास्त्रों के अनुसार, श्रृंगार की सामग्री को हमेशा दक्षिण-पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में रखना सबसे बेहतर होता है।
3. रंगों का सही चयन
हर रंग की अपनी एक ऊर्जा होती है। विवाहित महिलाओं के लिए लाल और हरी चूड़ियां सबसे शुभ मानी जाती हैं। लाल रंग शक्ति और प्रेम का प्रतीक है, जबकि हरा रंग खुशहाली और प्रगति को दर्शाता है। शनिवार के दिन गहरे नीले या काले रंग की चूड़ियां पहनने से बचना चाहिए।
दान और उपहार के नियम
शास्त्रों में बताया गया है कि अपनी पहनी हुई चूड़ियां कभी भी किसी को दान में नहीं देनी चाहिए। इससे आपके जीवन की सकारात्मक ऊर्जा दूसरे के पास चली जाती है। यदि आप किसी को उपहार देना चाहती हैं, तो हमेशा नई चूड़ियां ही दें। स्रोतों के अनुसार, उपहार में मिली चूड़ियां आपसी प्रेम को बढ़ाती हैं, लेकिन उनका टूटा न होना अनिवार्य है।
चूड़ियां पहनते समय रखें ये सावधानी
चूड़ियां पहनते समय इस बात का ध्यान रखें कि वो बहुत ज्यादा ढीली या बहुत ज्यादा कसी हुई न हों। वास्तु की दृष्टि से यह आपके आत्मविश्वास और स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। साथ ही, मंगलवार और शनिवार को नई चूड़ियां खरीदने से बचना चाहिए, इसके बजाय गुरुवार या शुक्रवार का दिन सबसे उत्तम होता है।
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