लॉस एंजिलिस : इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म की वजह से बच्चों के बिगड़ते मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े एक अहम मुकदमे की सुनवाई में पेश हुए मेटा प्लेटफार्म के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि कंपनी 13 वर्ष से कम आयु के बच्चों को अपने प्लेटफार्म पर अनुमति नहीं देती। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि स्क्रीन टाइम बढ़ाने के लिए भी मेटा ने कोई एप डिजाइन नहीं किया है।
हालांकि, वादी पक्ष के वकील ने सुबूतों के साथ उनके दावे की हवा निकाल दी, जिस पर जुकरबर्ग के पास कहने को कुछ नहीं बचा। यह मामला एक महिला द्वारा दायर किया गया है, जिसने आरोप लगाया है कि बचपन में इंस्टाग्राम और यूट्यूब के उपयोग से उसके मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ा।
वादी पक्ष के वकील मार्क लैनियर ने जुकरबर्ग से 2024 में कांग्रेस के समक्ष दिए गए उनके बयान का हवाला देते हुए जिरह की और कंपनी के कुछ आंतरिक दस्तावेज पेश किए। इनमें 2018 की एक प्रस्तुति का उल्लेख था, जिसमें “ट्वीन'' (किशोरावस्था से पहले की उम्र) वर्ग को जोड़ने की रणनीति पर चर्चा दिखाई गई।
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बता दें कि 2018 में आंतरिक इंस्टाग्राम प्रस्तुति में कहा गया था कि यदि हमें बड़ी संख्या में किशोरों को जोड़ना है तो उन्हें ट्वीन के रूप में अपने साथ लाना होगा।इस पर जुकरबर्ग ने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और कंपनी ने समय-समय पर बच्चों के लिए सुरक्षित सेवाओं के विकल्पों पर विचार किया, लेकिन 13 वर्ष से कम आयु के लिए अलग इंस्टाग्राम संस्करण लांच नहीं किया।
मुकदमे में यह भी तर्क दिया गया है कि कंपनियां बच्चों को अपने प्लेटफार्म पर अधिक समय बिताने के लिए प्रोत्साहित करती रहीं। जिरह के दौरान 2014-15 के ईमेल दिखाए गए, जिनमें यूजर्स का स्क्रीन टाइम बढ़ाने के लक्ष्य का जिक्र था। जुकरबर्ग ने कहा कि कंपनी का दृष्टिकोण समय के साथ बदला है और अब सुरक्षा उपायों पर अधिक जोर है।
यह मामला अमेरिका में इंटरनेट मीडिया कंपनियों के खिलाफ चल रही व्यापक कानूनी कार्रवाइयों का हिस्सा है। गूगल, स्नैप और टिकटाक जैसी कंपनियां भी इसी तरह के आरोपों का सामना कर रही हैं। लॉस एंजिलिस की जूरी यदि मेटा के खिलाफ फैसला देती है तो कंपनी को हर्जाना चुकाना पड़ सकता है और इससे अन्य मामलों पर भी असर पड़ सकता है।
गौरतलब है कि मेटा के आंतरिक दस्तावेजों की छानबीन में पता चला है कि कंपनी अपने प्लेटफार्म्स की वजह से होनेवाले घातक नुकसान से अच्छी तरह वाकिफ थी। मेटा के शोधकर्ताओं ने पाया था कि नियमित तौर पर इंस्टाग्राम का इस्तेमाल करनेवाले कुछ किशोर अपने शरीर को लेकर खराब महसूस करने लगते हैं। इससे उनमें ज्यादा खाने की ललक बढ़ने लगती है।
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