निजी इंजीनियरों से बन रहे इस्टीमेट, गुणवत्ता पर गंभीर सवाल
परमेश्वर राजपूत, गरियाबंद /छुरा : प्रदेश में नगरीय निकायों को आदर्श बनाने के दावों के बीच छुरा नगर पंचायत की हकीकत चौंकाने वाली है। यहां पिछले छह वर्षों से नियमित इंजीनियर (अभियंता) का पद रिक्त पड़ा है। तकनीकी व्यवस्था ‘प्रभार’ और ‘जुगाड़’ के सहारे चल रही है, जिससे विकास कार्यों की रफ्तार थम सी गई है और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
महीने में सिर्फ 3–4 दिन उपस्थिति, 26 दिन ‘तकनीकी अनाथ’ नगर पंचायत
सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में प्रभार संभाल रहे इंजीनियर की उपस्थिति महीने में मात्र 3–4 दिन ही रहती है। बाकी समय नगर पंचायत तकनीकी रूप से ‘अनाथ’ बनी रहती है। सड़कों, नालियों, सीसी रोड, सार्वजनिक भवनों और जल निकासी से जुड़े कार्यों का न तो नियमित निरीक्षण हो पा रहा है और न ही समय पर तकनीकी मार्गदर्शन मिल रहा है।तकनीकी स्वीकृति, माप पुस्तिका (एमबी) संधारण और बिल परीक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्य लंबित पड़े हैं। इससे विकास कार्यों में अनावश्यक देरी हो रही है और कई परियोजनाएं कागजों तक सीमित होकर रह गई हैं।
निजी इंजीनियरों के भरोसे इस्टीमेट
स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि छोटे-बड़े निर्माण कार्यों के प्राक्कलन (इस्टिमेट) तैयार करने के लिए निजी इंजीनियरों की सेवाएं लेनी पड़ रही हैं। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। पार्षदों का कहना है कि नियमित तकनीकी अधिकारी की अनुपस्थिति में ठेकेदारों की मनमानी बढ़ी है और मौके पर गुणवत्ता परीक्षण नहीं हो पा रहा।
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विपक्ष का हमला: ‘ट्रिपल इंजन सरकार’ में भी नियुक्ति नहीं
नेता प्रतिपक्ष हरीश यादव ने सरकार और नगरीय निकाय प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “ट्रिपल इंजन सरकार” के बावजूद नगर पंचायत में नियमित इंजीनियर की नियुक्ति नहीं होना गंभीर विफलता है। उन्होंने आरोप लगाया कि उधार के इंजीनियर से काम चलाने के कारण निर्माण कार्य बाधित हैं और पार्षद निधि का समुचित उपयोग भी समय पर नहीं हो पा रहा।वरिष्ठ पार्षद सलीम मेमन ने कहा कि राज्य और केंद्र में भाजपा की सरकार होने के बावजूद एक इंजीनियर की नियुक्ति तक नहीं हो पा रही है। “जो काम हो भी रहे हैं, वे बिना देखरेख के हो रहे हैं। पार्षद चाहकर भी अपने वार्ड में विकास कार्य नहीं करा पा रहे,” उन्होंने कहा।
पार्षद देवसिंह नेताम और पंच राम टंडन ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि जनता ने विकास की उम्मीद में सरकार चुनी, लेकिन पार्षद बनने के बाद से उन्होंने नियमित इंजीनियर का ‘दर्शन’ तक नहीं किया। नगर में नालियों के ढक्कन, सीसी रोड और अन्य बुनियादी कार्य लंबित पड़े हैं।
गुणवत्ता पर संकट, कौन लेगा जिम्मेदारी?
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि तकनीकी निगरानी के अभाव में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। बिना मौके पर निरीक्षण किए बिल भुगतान और एमबी एंट्री की प्रक्रिया औपचारिकता बनकर रह गई है।आगामी बारिश से पहले जल निकासी और सड़क निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों का पूरा होना अनिवार्य है, लेकिन नियमित अभियंता के अभाव में ये योजनाएं अधर में लटकी हैं। यदि समय रहते नियुक्ति नहीं हुई, तो करोड़ों रुपये के कार्यों की गुणवत्ता और समयसीमा दोनों पर खतरा मंडरा सकता है।
जनआक्रोश बढ़ा, तत्काल नियुक्ति की मांग
नगर के प्रबुद्ध नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि छुरा जैसी महत्वपूर्ण नगर पंचायत में तत्काल पूर्णकालिक इंजीनियर की पदस्थापना की जाए। उनका कहना है कि विकास कार्यों की पारदर्शिता, गुणवत्ता और समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए नियमित तकनीकी अधिकारी की नियुक्ति अत्यावश्यक है।अब सवाल यह है कि छह वर्षों से रिक्त पड़े इस महत्वपूर्ण पद पर आखिर कब नियुक्ति होगी और विकास की गाड़ी ‘प्रभार’ की बैसाखी से मुक्त होकर रफ्तार पकड़ेगी?
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