फर्जी अंकसूची से पाई नौकरी, 17 साल बाद कोर्ट ने सुनाई सजा

फर्जी अंकसूची से पाई नौकरी, 17 साल बाद कोर्ट ने सुनाई सजा

जांजगीर-चांपा : कूटरचित अंकसूची और फर्जी खेलकूद प्रमाण पत्र के आधार पर शिक्षाकर्मी की नौकरी पाने वाले चितरंजन प्रसाद कश्यप को जैजैपुर न्यायालय ने दोषी ठहराते हुए सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। फैसला न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी न्यायालय जैजैपुर के राजेश खलखो ने सुनाया।

न्यायालय ने आरोपी को धारा 420 के तहत 2 वर्ष, धारा 468 के तहत 1 वर्ष और धारा 474 के तहत 1 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा दी। साथ ही अर्थदंड भी लगाया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

अभियोजन के अनुसार आरोपी ने वर्ष 2007 में माल्दा स्थित पीतांबर हायर सेकेंडरी स्कूल से विज्ञान विषय में हायर सेकेंडरी परीक्षा दी थी, जिसमें उसे 500 में 257 अंक प्राप्त हुए थे। शिक्षाकर्मी पद के लिए आवेदन करते समय उसने अंक बढ़ाकर 500 में 405 दर्शाए और फर्जी अंकसूची संलग्न की। भौतिकी विषय में सप्लीमेंट्री को डिस्टिंक्शन दिखाया गया तथा अन्य विषयों के अंक भी बढ़ाए गए। इसी आधार पर उसने नौकरी प्राप्त कर ली और वर्षों तक कार्य करता रहा।

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वर्ष 2018 में ग्राम सेमरिया निवासी पोथीराम कश्यप ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत की। जांच में आरोप सही पाए गए, जिसके बाद थाना हसौद में अपराध दर्ज कर विवेचना की गई। पुलिस ने प्रकरण में चालान वर्ष 2019 में न्यायालय में प्रस्तुत किया।

सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान और जिरह के आधार पर न्यायालय ने माना कि आरोपी ने जानबूझकर फर्जी दस्तावेज तैयार कर नौकरी हासिल की। फैसले के साथ ही लंबे समय से लंबित मामला निर्णायक मोड़ पर पहुंचा।










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