परमेश्वर राजपूत, गरियाबंद / छुरा : वनांचल क्षेत्र स्थित शासकीय प्राथमिक शाला कोसमी में शिक्षा गुणवत्ता और अधोसंरचना सुधार की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की शुक्रवार को जिला शिक्षा अधिकारी ने सराहना की। 20 फरवरी 2026 को जिला शिक्षा अधिकारी जगजीत सिंह धीर एवं सांख्यिकी अधिकारी श्याम कुमार चंद्राकर द्वारा विद्यालय का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान विद्यालय में किए गए नवाचार और व्यवस्थाओं को देखकर अधिकारियों ने संतोष व्यक्त किया।निरीक्षण में पाया गया कि संस्था के प्रधान पाठक हेमलाल ध्रुव द्वारा स्वयं के व्यय से विद्यालय भवन की मरम्मत कराई गई है। भवन के खिड़की-दरवाजों का रंगरोगन कराया गया है तथा विद्यालय परिसर में आकर्षक और शैक्षणिक “प्रिंट रिच वातावरण” का निर्माण किया गया है। दीवारों पर शैक्षणिक सामग्री, चार्ट, अक्षर-ज्ञान, गणितीय सारणी और प्रेरक संदेशों के माध्यम से बच्चों के लिए सीखने का अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है। अधिकारियों ने इसे शिक्षा क्षेत्र में अनुकरणीय पहल बताया।
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प्रधान पाठक के इन प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति पर स्पष्ट रूप से देखा गया। विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और विद्यार्थियों का शैक्षणिक स्तर भी सामान्य से ऊपर उठा है। निरीक्षण के दौरान कक्षाओं में बच्चों की सक्रिय भागीदारी और विषयों की समझ को देखकर अधिकारी संतुष्ट नजर आए।बच्चों के पोषण स्तर को ध्यान में रखते हुए मध्यान्ह भोजन व्यवस्था में भी विशेष सुधार किया गया है। सप्ताह में चार दिन हरी सब्जी तथा दो दिन सूखी सब्जी के साथ दाल, अचार और पापड़ को नियमित रूप से शामिल किया जा रहा है। संतुलित और गुणवत्तापूर्ण भोजन मिलने से बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार के साथ ही विद्यालय के प्रति उनका आकर्षण भी बढ़ा है।
विद्यालय में हुए इन सकारात्मक परिवर्तनों का असर अभिभावकों के रुझान में भी दिखाई दे रहा है। पालकों का विश्वास विद्यालय के प्रति मजबूत हुआ है तथा वे बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने में सहयोग कर रहे हैं।जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा निरीक्षण के दौरान विद्यालय के सभी शिक्षक उपस्थित मिले वहीं विद्यालय स्टाफ को इसी प्रकार समर्पण भाव से कार्य करते रहने के लिए प्रोत्साहित किया तथा अन्य विद्यालयों के लिए इसे प्रेरणास्रोत बताया। वनांचल क्षेत्र में संसाधनों की सीमाओं के बावजूद शासकीय प्राथमिक शाला कोसमी द्वारा प्रस्तुत यह उदाहरण शिक्षा सुधार की दिशा में एक सार्थक कदम माना जा रहा है।
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