सुकमा : नक्सल आतंक के कारण लगभग 24 वर्षों से बंद पड़े पोलमपल्ली के ऐतिहासिक राम मंदिर में एक बार फिर भक्ति की ज्योति प्रज्वलित हो उठी। लंबे अंतराल के बाद वैदिक मंत्रोच्चार, यज्ञ-हवन और “जय श्रीराम” के उद्घोष से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया। वर्षों से सूना पड़ा यह मंदिर अब पुनः श्रद्धा, आस्था और सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का प्रतीक बनकर उभरा है।बताया जाता है कि नक्सल प्रभाव और विरोध के चलते सुकमा जिले के अंदरूनी क्षेत्रों में सनातन धर्म से जुड़ी गतिविधियाँ लगभग ठप हो गई थीं। सलवा जुडूम के समय यह मंदिर बंद हो गया था और तब से यहां नियमित पूजा-अर्चना नहीं हो पा रही थी। परंतु अब केंद्र और राज्य सरकार की सशक्त नक्सल-विरोधी कार्यवाहियों के परिणामस्वरूप क्षेत्र में शांति और सुरक्षा का वातावरण निर्मित हुआ है। इसी सकारात्मक परिवेश में पोलमपल्ली के राम मंदिर में पुनः पूजा प्रारम्भ होना एक ऐतिहासिक और भावनात्मक क्षण बन गया।
वैदिक मंत्रों से गूंजा पोलमपल्ली
पूजा-अर्चना का शुभारंभ वैदिक विधि-विधान से किया गया। यज्ञ-हवन के साथ मंत्रोच्चार कर रामभक्तों ने प्रभु श्रीराम से क्षेत्र में सुख, समृद्धि और शांति की कामना की। पूरा पोलमपल्ली उस समय भक्ति रस में डूब गया जब हनुमान चालीसा और श्रीराम की धुन पर श्रद्धालु झूमते हुए यज्ञ स्थल की परिक्रमा कर रहे थे। वर्षों बाद ऐसा दृश्य देखने को मिला, जब ग्रामीणों की आंखों में आस्था के साथ-साथ संतोष और गर्व भी झलक रहा था।
दीपिका शोरी की भावुक उपस्थिति ने बढ़ाया उत्साह
हमेशा सनातन धर्म के कार्यक्रमों में अग्रणी भूमिका निभाने वाली आदिवासी नेत्री एवं छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य अधिवक्ता दीपिका शोरी भी अपने समर्थकों के साथ यज्ञ स्थल पर पहुंचीं। मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही उनका भावुक रूप देखने को मिला। उन्होंने श्रद्धा से प्रभु श्रीराम की पूजा-अर्चना की और यज्ञ में आहुति देकर क्षेत्र की शांति और उन्नति की कामना की।
विशेष बात यह रही कि दीपिका शोरी ने स्वयं हनुमान चालीसा का पाठ किया। जब वे रामदेव नाग के साथ वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच हनुमान चालीसा पढ़ रही थीं, तब सैकड़ों श्रद्धालु एक स्वर में उनका साथ दे रहे थे। यह दृश्य ग्रामीणों के लिए अत्यंत प्रेरणादायी रहा। ग्रामीणों का कहना था कि जब उनका जनप्रतिनिधि उनके धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में पूरी सहभागिता निभाता है, तो उनमें उत्साह और आत्मविश्वास का संचार स्वतः हो जाता है।
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सनातन की लौ फिर हुई प्रज्वलित
पोलमपल्ली में राम मंदिर की पुनः शुरुआत केवल धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं है, बल्कि यह सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक भी है। लंबे समय तक भय और असुरक्षा के साये में जी रहे ग्रामीणों के लिए यह आयोजन आत्मविश्वास की नई किरण लेकर आया है।
नक्सलमुक्त होने पर प्रारम्भ हो रही धार्मिक गतिविधियां
अब जब क्षेत्र नक्सलमुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तो धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का पुनः प्रारंभ होना विकास और स्थायित्व का संकेत माना जा रहा है। ग्रामीणों ने विश्वास जताया कि श्रीराम की कृपा से क्षेत्र में शांति, सद्भाव और समृद्धि का मार्ग और अधिक प्रशस्त होगा।
आस्था का ऐतिहासिक क्षण
हनुमान चालीसा की गूंज, “जय श्रीराम” के उद्घोष और यज्ञ की पवित्र अग्नि के बीच पोलमपल्ली ने एक ऐतिहासिक पल को साक्षी बनाया। 24 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद जब मंदिर के द्वार पूर्ण रूप से खुले और नियमित पूजा का संकल्प लिया गया, तो यह केवल धार्मिक पुनरुत्थान नहीं बल्कि आत्मसम्मान और सांस्कृतिक अस्मिता की पुनर्स्थापना का भी क्षण बन गया।
पोलमपल्ली में प्रज्वलित यह सनातन ज्योति अब पूरे क्षेत्र में शांति, एकता और सकारात्मक परिवर्तन का संदेश दे रही है।
रामभक्तों ने आयोग सदस्य दीपिका शोरी से किया मंदिर में हैंडपंप की मांग
रामभक्तों ने इस धार्मिक अनुष्ठान के बीच पानी की कमी के सम्बंध में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग सदस्य अधिवक्ता दीपिका शोरी के समक्ष रखते हुए कहा कि पूर्व में जब मंदिर संचालित था तब भी हमारे बुजुर्ग इस समस्या से गुजर रहे थे आज भी वही समस्या है पीने के पानी की बहुत ज्यादा जरूरत है इसलिए एक हैंडपंप की व्यवस्था हो जाने से समस्या दूर होगी इस पर दीपिका ने भी उन्हें आश्वासन दिया कि जल्द ही आपकी यह समस्या दूर हो जाएगी।
रामायण मंडली ने की वाद्ययंत्रों की मांग
पोलमपल्ली में तोंगपाल से लेकर कोंटा तक के रामायण मंडली के सदस्य इस धार्मिक अनुष्ठान में पहुंचकर अपनी सहभागिता दे रहे थे उन्होंने अपनी अपनी मंडलियों के लिए वाद्ययंत्रों एवं साउंडबॉक्स की मांग की इस भी आयोग सदस्य दीपिका ने उन्हें आश्वासन दिया कि राज्य सरकार की योजनांतर्गत उन्हें लाभ दिलाने हेतु शासन से पत्राचार कर पहल किया जाएगा।
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