रायगढ़, 21 फरवरी 2026 : रायगढ़ जिले के खनिज उत्खनन से प्रभावित क्षेत्रों एवं सुदूर वनांचल विकासखंड धरमजयगढ़, लैलूंगा, घरघोड़ा, तमनार के साथ-साथ मैदानी क्षेत्र रायगढ़, पुसौर और खरसिया के किसानों को आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बनाने की दिशा में जिला प्रशासन सक्रिय है। ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर लाभकारी एवं वैकल्पिक फसलों को प्रोत्साहित करने के लिए कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी ने कृषि विभाग को ठोस कार्ययोजना तैयार कर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। धरमजयगढ़ विकासखंड के निरीक्षण भ्रमण के दौरान कलेक्टर श्री चतुर्वेदी ग्राम पुरूंगा पहुंचे, जहां उन्होंने लगभग 35 हेक्टेयर क्षेत्र में लगाई गई मक्का तथा 10 हेक्टेयर में बोई गई उड़द फसल का अवलोकन किया। पूर्व वर्षों में जहां किसान ग्रीष्मकालीन धान की बुवाई करते थे, वहीं इस वर्ष कृषि विभाग के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना एवं फसल प्रदर्शन योजना के तहत किसानों ने फसल विविधीकरण अपनाते हुए मक्का और उड़द की खेती शुरू की है।
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मक्का उत्पादक किसान श्री उत्तरा पटेल एवं श्री जनक राम पटेल ने बताया कि इस वर्ष उन्होंने 2-2 हेक्टेयर में मक्का की खेती की है तथा अन्य किसानों के साथ मिलकर कुल 35 हेक्टेयर क्षेत्र में मक्का बोया गया है। इसके अतिरिक्त 10 हेक्टेयर क्षेत्र में उड़द की फसल ली जा रही है। किसानों के अनुसार वर्तमान में मक्का का संभावित विक्रय मूल्य 18 से 20 रुपये प्रति किलोग्राम मिल रहा है।
कलेक्टर ने मौके पर उपस्थित कृषि अधिकारियों को एथेनॉल निर्माण से जुड़ी मां मंगला इस्पात प्राइवेट लिमिटेड से समन्वय स्थापित कर किसानों को बेहतर बाजार मूल्य उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इस दौरान कृषि विभाग द्वारा किसानों को रासायनिक उर्वरकों के अग्रिम उठाव, नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के उपयोग, फसल अवशेष न जलाने तथा प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के अंतर्गत सेवा सहकारी समिति छाल एवं धरमजयगढ़ में सरसों, चना एवं मसूर फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर विक्रय हेतु पंजीयन कराने संबंधी जानकारी भी प्रदान की गई।निरीक्षण के दौरान धरमजयगढ़ एसडीएम श्री प्रवीण भगत, कृषि एसडीओ प्रभास शंकर सिंह, तहसीलदार लोमस मिरी, जनपद सीईओ सहित मक्का उत्पादक किसान उपस्थित थे।
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