वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रंगभरी एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करने से साधक को जीवन में सभी सुख मिलते हैं और संकटों से मुक्ति मिलती है।
इस दिन तुलसी पूजा का भी विशेष महत्व है, लेकिन तुलसी से जुड़े नियम का पालन जरूर करना चाहिए। इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। इस बार रंगभरी एकादशी 27 फरवरी को मनाई जाएगी। आइए आपको बताते हैं कि रंगभरी एकादशी के दिन तुलसी से जुड़ी कौन-सी गलतियों करने से बचना चाहिए।
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तुलसी पूजा के नियम
रंगभरी एकादशी 2026 डेट और शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन में रंगभरी एकादशी 27 फरवरी को मनाई जाएगी।
फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत- 27 फरवरी को देर रात 12 बजकर 33 मिनट पर
फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का समापन- 27 फरवरी को रात 10 बजकर 32 मिनट पर होगा
तुलसी स्तुति मंत्र -
देवी त्वं निर्मिता पूर्वमर्चितासि मुनीश्वरैः
नमो नमस्ते तुलसी पापं हर हरिप्रिये।।
तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी।
धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमन: प्रिया।।
लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्।
तुलसी भूर्महालक्ष्मी: पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया।।
तुलसी गायत्री -
ॐ तुलसीदेव्यै च विद्महे, विष्णुप्रियायै च धीमहि, तन्नो वृन्दा प्रचोदयात् ।।
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