फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रंगभरी एकादशी कहा जाता है। इस साल यह पावन तिथि 27 फरवरी को मनाई जाएगी। यूं तो हर एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है, लेकिन रंगभरी एकादशी एकमात्र ऐसी एकादशी है, जिसका संबंध भगवान शिव और माता पार्वती से है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन बाबा विश्वनाथ माता पार्वती का गौना कराकर अपनी नगरी काशी लाए थे। उनके स्वागत में पूरी काशी नगरी ने अबीर-गुलाल उड़ाकर खुशियां मनाई थीं। इसलिए, इस दिन शिवलिंग पर गुलाल चढ़ाने का खास महत्व है।
माना जाता है कि जो भक्त सही विधि से महादेव को रंग-गुलाल अर्पित करते हैं, उनके जीवन से दुखों के काले बादल छंट जाते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। आइए जानते हैं कि शिवलिंग पर गुलाल चढ़ाने की सही विधि क्या है?
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शिवलिंग पर गुलाल चढ़ाने की विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले या लाल कपड़े पहनें।
मंदिर जाकर सबसे पहले शिवलिंग पर शुद्ध जल और गंगाजल अर्पित करें।
इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से भोलेनाथ का अभिषेक करें।
फिर दाहिने हाथ की अनामिका और अंगूठे से गुलाबी या लाल गुलाल लेकर शिवलिंग पर अर्पित करें।
गुलाल चढ़ाते समय "ॐ नमः शिवाय" या "ॐ गौरीशंकराय नमः" का जप करते रहें।
महादेव के साथ माता पार्वती को भी लाल गुलाल और सुहाग की सामग्री चढ़ाएं। माना जाता है कि शिव-शक्ति को एक साथ रंग लगाने से दांपत्य जीवन के क्लेश दूर होते हैं।
गुलाल के साथ-साथ ये शुभ चीजें भी चढ़ा सकते हैं
यह आमलकी एकादशी भी है, इसलिए अच्छी सेहत के लिए आंवला जरूर चढ़ाएं।
धन की तंगी दूर करने के लिए 11 बिल्व पत्र और शमी के पत्ते चढ़ाएं।
रिश्तों में प्यार बढ़ाने के लिए चंदन का इत्र महादेव को लगाएं।
रंगभरी एकादशी का महत्व
शास्त्रों के अनुसार, रंगभरी एकादशी होली के त्योहार की शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन जो भक्त शिव-पार्वती की विधिवत पूजा करते हैं, उनके भाग्य के बंद दरवाजे खुल जाते हैं। यह दि
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