रायगढ़ : जिले के लैलूंगा विकासखंड से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाली एक गंभीर तस्वीर सामने आई है, जहाँ ग्राम पंचायत रूडूकेला स्थित माध्यमिक विद्यालय में बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। स्कूल परिसर में जहाँ बच्चों के हाथों में कलम और किताबें होनी चाहिए थीं, वहाँ स्कूल प्रबंधन ने उन्हें बाल्टियां और बर्तन थमा दिए हैं। जानकारी के मुताबिक, स्कूल में पानी की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण मासूम छात्र-छात्राओं को पढ़ाई छोड़कर पानी ढोने के काम में लगा दिया गया है। ग्रामीणों और चश्मदीदों का कहना है कि यह किसी एक दिन की बात नहीं है, बल्कि विद्यालय में यह एक नियमित प्रक्रिया बन चुकी है, जहाँ सुबह की घंटी बजते ही बच्चे क्लासरूम में बैठने के बजाय हैंडपंप और अन्य जल स्रोतों की ओर दौड़ने को मजबूर होते हैं।
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स्कूल प्रबंधन की इस तानाशाही और लापरवाही ने अभिभावकों के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि बच्चे दूर-दराज से पैदल चलकर स्कूल पढ़ने आते हैं, लेकिन वहां पहुंचते ही उन्हें शारीरिक श्रम में झोंक दिया जाता है। कई चक्कर लगाकर पानी भरने के कारण बच्चे पढ़ाई शुरू होने से पहले ही बुरी तरह थक जाते हैं, जिससे न केवल उनका शारीरिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है बल्कि उनकी मानसिक एकाग्रता और पढ़ाई में रुचि भी खत्म होती जा रही है। बाल अधिकारों का सीधा उल्लंघन होने के बावजूद, स्कूल प्रशासन इस समस्या का कोई वैकल्पिक हल निकालने के बजाय मासूम बच्चों को ही श्रमिक के रूप में इस्तेमाल कर रहा है, जो कि पूरी तरह से अनैतिक और नियम विरुद्ध है।
इस पूरे मामले के उजागर होने के बाद अब स्थानीय लोगों ने शिक्षा विभाग और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अभिभावकों का स्पष्ट कहना है कि वे अपने बच्चों को स्कूल पढ़ने और अपना भविष्य संवारने के लिए भेजते हैं, न कि स्कूल की अव्यवस्थाओं को दूर करने के लिए मजदूरी करवाने। यदि ग्राम पंचायत और स्कूल शिक्षा विभाग ने तुरंत पेयजल की स्थायी व्यवस्था नहीं की और बच्चों से काम करवाना बंद नहीं किया, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। अब यह देखना होगा कि रायगढ़ का शिक्षा विभाग इस संवेदनशील मामले पर क्या कार्रवाई करता है और रूडूकेला के इन मासूम बच्चों को बाल्टियों के बोझ से कब तक आजादी मिल पाती है।
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