रायपुर : सीजीपीएससी द्वारा राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 के अंतर्गत पूछे गए सवालों में धर्म, साहित्य और इतिहास से जुड़े सवालों की अधिकता रही। 239 पदों के लिए सीजी पीएससी द्वारा यह परीक्षा आयोजित की जा रही है। 2024 की परीक्षा में 1.58 लाख उम्मीदवारों ने आवेदन किया था। इस बार भी आवेदन संख्या इसके समकक्ष रही। राजधानी में अभ्यर्थियों की संख्या 19,247 रही सभी 33 जिलों में इसके लिए केंद्र बनाए गए थे। रायपुर में 48 केंद्रों में यह परीक्षा हुई। परीक्षा के प्रथम पाली की परीक्षा 10 बजे से 12 बजे तक आयोजित हुई। प्रथम पाली में उपस्थिति का आंकड़ा 76.2 रहा। 19,247 में से 14,658 परीक्षार्थी उपस्थित रहे। द्वितीय पाली की परीक्षा दोपहर 3 से 5 बजे तक आयोजित की गई। इसमें उपस्थिति प्रथम पाली से कम रही। 74.62 प्रतिशत ही परीक्षा दिलाने पहुंचे। परीक्षा के द्वितीय पाली में 14,363 परीक्षार्थी उपस्थित रहे।
परीक्षा देकर निकले परीक्षार्थियों के मुताबिक, 30 से 35 प्रतिशत सवालों का स्तर अत्यधिक कठिन रहा। शेष सवाल सरल से औसत स्तर के रहे। खाद्य श्रृंखला, जीआई टैग, ग्राम सभा, छग में बेगार प्रथा के खिलाफ बगावत, छग के शुष्क साल के वन, छग में गार्नेट खनिज किन जिलों में मिलता है, छग में बिहई क्या है, खारुन नदी से संबंधित तथ्य, सरहुल त्योहार का आयोजन जैसे छत्तीसगढ़ से जुड़े सवाल प्रश्नपत्र का हिस्सा रहे। खबर लिखे जाने तक किसी तरह के नकल प्रकरण या अव्यवस्था की शिकायत पीएससी को प्राप्त नहीं हुई थी। मुख्य परीक्षा 16 से 19 मई तक संभावित है।
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बगैर सहायक हल किया पर्चा
पीएससी ने दिव्यांग अभ्यर्थियों को सहायक की सुविधा प्रदान की थी। इसके लिए तय समय पर उन्हें आवेदन करना था। राजधानी रायपुर में एक ऐसा उदाहरण भी सामने आया, जिसमें दिव्यांग परीक्षार्थी ने सहायक की सुविधा नहीं ली। भाठागांव निवासी दामिनी सेन प्यारे लाल यादव हिंदू हाई स्कूल स्थित परीक्षा केंद्र में पर्चा दिलाने पहुंची थी। दोनों हाथों से दिव्यांग दामिनी ने पैरों से परीक्षा दिलाई।
कठिन रहा पेपर
प्रतियोगी परीक्षा विशेषज्ञ अंकित अग्रवाल ने बताया कि, प्रिलिम्स के दोनों पेपर मानक स्तर के रहे। पेपर-1 में कथन-कारण और तथ्यों पर आधारित प्रश्न अधिक थे। पाठ्यक्रम के समस्त पक्षों को संतुलित रूप से समाहित किया गया। विगत वर्षों की तुलना में इस बार पेपर थोड़ा कठिन रहा। पेपर-2 सीसेट मॉडरेट था। सीजी पीएससी प्रिलिम्स साल-दर-साल क्रमशः कठिन हो रही है। इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। ठोस तैयारी और रणनीति के साथ ही इसे क्लीयर किया जा सकता है।
ये सवाल रहे प्रश्नपत्र का हिस्सा
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