सनातन धर्म में खरमास का खास महत्व है। हालांकि, खरमास के दौरान शुभ काम करने की मनाही होती है। वहीं, खरमास के दौरान सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति विशेष को दोगुना फल मिलता है। कहते हैं कि खरमास के दौरान सूर्य का प्रभाव बढ़ जाता है। इसके लिए खरमास की अवधि में सूर्य देव की विशेष पूजा की जाती है। लेकिन क्या आपको पता है कि खरमास कब लगता है? आइए, इसके बारे में सबकुछ जानते हैं
कब लगता है खरमास?
ज्योतिषियों की मानें तो आत्मा के कारक सूर्य देव के धनु और मीन राशि में गोचर करने के दौरान खरमास लगता है। सूर्य के धनु और मीन राशि में गोचर करने के दौरान गुरु का प्रभाव क्षीण या शून्य हो जाता है। इसके लिए खरमास के दिनों में शुभ काम करने की मनाही होती है।
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सूर्य देव के राशि परिवर्तन करने की तिथि पर संक्रांति मनाई जाती है। सूर्य देव के मीन राशि में गोचर करने पर मीन संक्रांति मनाई जाती है। इस दिन सूर्य देव की पूजा की जाती है। साथ ही जप-तप और दान-पुण्य किया जाता है।
कब से शुरू होगा खरमास?
ज्योतिष गणना अनुसार, आत्मा के कारक सूर्य देव 15 मार्च को कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में गोचर (Sun Transit in Pisces) करेंगे। मीन राशि में सूर्य देव के गोचर से खरमास शुरू होगा। इस दिन से सभी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्य पर विराम लग जाएगा। वहीं, 14 अप्रैल को खरमास समाप्त होगा।
सूर्य मंत्र
जपाकुसुम संकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम ।
तमोsरिं सर्वपापघ्नं प्रणतोsस्मि दिवाकरम ।।
2. ऊँ आकृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यण्च ।
हिरण्य़येन सविता रथेन देवो याति भुवनानि पश्यन ।।
3. ऊँ आदित्याय विदमहे दिवाकराय धीमहि तन्न: सूर्य: प्रचोदयात ।।
4. ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय सहस्रकिरणाय नमः
5. ध्याये न्नृसिंहं तरुणार्कनेत्रं सिताम्बुजातं ज्वलिताग्रिवक्त्रम्।
अनादिमध्यान्तमजं पुराणं परात्परेशं जगतां निधानम्।।
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