किरंदुल:लौहनगरी किरंदुल के बैलाडीला देवस्थान स्थित श्री राघव मंदिर परिसर में सोमवार की मध्यरात्रि श्रद्धा, भक्ति और वैदिक परंपरा के अनुपम संगम के बीच होलिका दहन का पावन आयोजन गरिमामय ढंग से संपन्न हुआ। निर्धारित शुभ मुहूर्त के अनुसार रात्रि 12:00 बजे आचार्यगणों ने वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधिवत पूजन-अर्चन के पश्चात होलिका की पवित्र अग्नि प्रज्वलित की। अग्नि की लौ के साथ पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और उल्लास से आलोकित हो उठा।
फाल्गुन पूर्णिमा पर लग रहे चंद्रग्रहण, सूतक काल एवं भद्रा की स्थिति को ध्यान में रखते हुए विद्वान पंडितों एवं सनातन समाज के प्रतिनिधियों द्वारा पूर्व में लिया गया निर्णय पूर्णतः शास्त्रसम्मत सिद्ध हुआ। आयोजन में काशी की प्राचीन धार्मिक परंपरा एवं दंतेवाड़ा स्थित माँ दंतेश्वरी मंदिर की परिपाटी का अनुकरण किया गया, जिससे कार्यक्रम की धार्मिक मर्यादा और भी सुदृढ़ हुई।
संध्या से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लगना प्रारंभ हो गया था। महिलाओं, पुरुषों एवं बच्चों ने परिवार की सुख-समृद्धि, नगर की उन्नति तथा समाज में शांति एवं समरसता की कामना करते हुए विधिवत पूजा-अर्चना की। जैसे ही मध्यरात्रि में अग्नि प्रज्वलित हुई, “होलिका माता की जय” के जयघोष से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा और भक्ति का अद्भुत दृश्य उपस्थित हो गया।
मंदिर परिसर को आकर्षक विद्युत सज्जा एवं पुष्प अलंकरण से भव्य रूप प्रदान किया गया था, जिसने आयोजन की दिव्यता को और निखार दिया। कार्यक्रम का सफल संचालन श्री राम जनकल्याण सेवा समिति, श्री राघव मंदिर समिति एवं गायत्री परिवार, बैलाडीला देवस्थान के संयुक्त तत्वावधान में सुव्यवस्थित एवं अनुशासित रूप से किया गया।
इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती रूबी शैलेन्द्र सिंह, भूतपूर्व अध्यक्ष श्री शैलेन्द्र सिंह, पार्षदगण, बैलाडीला देवी स्थान समिति के प्रधान पुजारी श्री सत्येंद्र शुक्ला जी, सचिव श्री ए.के. सिंह जी, श्री डी.पी. डहरिया सहित समिति के पदाधिकारी एवं नगर के अनेक सामाजिक, धार्मिक और प्रशासनिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
समिति ने आयोजन की सफलता पर समस्त नगरवासियों के प्रति आभार प्रकट करते हुए आगामी धुलेंडी पर्व (बुधवार, 4 मार्च 2026) को पारंपरिक उत्साह, सामाजिक समरसता और भाईचारे के साथ मनाने का आह्वान किया। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि नगर की सांस्कृतिक एकता और सामाजिक सौहार्द का सशक्त उदाहरण भी प्रस्तुत किया गया।
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