प्रधान अध्यापक पदों पर 4 साल से सन्नाटा, शिक्षकों की चेतावनी—मार्च तक पदोन्नति नहीं तो आंदोलन

प्रधान अध्यापक पदों पर 4 साल से सन्नाटा, शिक्षकों की चेतावनी—मार्च तक पदोन्नति नहीं तो आंदोलन

जगदलपुर : बस्तर संभाग में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा अब आंदोलन की राह पकड़ता नजर आ रहा है। माध्यमिक शाला के प्रधान अध्यापकों के पद पिछले चार वर्षों से खाली पड़े हैं, लेकिन अब तक पदोन्नति प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों ने ज्वाइंट डायरेक्टर कार्यालय पहुंचकर इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया।

संभाग सचिव रामचंद्र सोनवानी ने साफ कहा कि विभाग ने पहले समय सारिणी जारी की थी, लेकिन उसके अनुसार प्रक्रिया को अमल में नहीं लाया गया। अधिकारियों की दलील है कि कई जिलों में सर्विस बुक का संधारण सही तरीके से नहीं हुआ, जिसके चलते प्रक्रिया अटकी हुई है। हालांकि इस मुद्दे को लेकर शिक्षक संगठन अब तक चार बार अधिकारियों से मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन समाधान नहीं निकला।

स्कूलों की शैक्षणिक गुणवत्ता हो रही प्रभावित

शिक्षकों का कहना है कि प्रधान अध्यापकों के पद खाली रहने से स्कूलों की शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। यदि पदोन्नति होती है तो न सिर्फ माध्यमिक स्तर पर सुधार होगा, बल्कि उच्च श्रेणी और सहायक शिक्षकों की पदोन्नति की प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी। आज हुई बैठक में जेडी कार्यालय ने आश्वासन दिया है कि मार्च के अंत तक पदोन्नति सूची जारी कर दी जाएगी, लेकिन शिक्षकों ने भी साफ कर दिया है कि अब और इंतजार नहीं किया जाएगा। संघर्ष मोर्चा ने 27 मार्च तक की समय-सीमा तय की है। यदि इस तारीख तक पदोन्नति सूची जारी नहीं होती है तो 30 मार्च को पूरे बस्तर संभाग में एक दिवसीय सांकेतिक आंदोलन किया जाएगा।









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