(अरुण शर्मा, संवाददाता) सुकमा : जिले में प्रस्तावित 1.25 लाख टन लौह कचरा (टेलिंग्स) डंपिंग परियोजना अब बड़े विवाद का रूप ले चुकी है। शबरी नदी के बेहद नजदीक इस डंपिंग की तैयारी ने न सिर्फ पर्यावरण प्रेमियों बल्कि आम जनता के बीच भी जबरदस्त चिंता और आक्रोश पैदा कर दिया है।जानकारों के मुताबिक, अगर इतनी भारी मात्रा में टेलिंग्स डंप की जाती है, तो इसका सीधा असर जल, जंगल और जमीन पर पड़ेगा। सबसे बड़ा खतरा शबरी नदी के प्रदूषण का है, जिससे हजारों लोगों की पेयजल व्यवस्था और खेती-किसानी पर संकट मंडरा सकता है।
जनता का फूटा गुस्सा, उठे तीखे सवाल
इस मुद्दे ने अब पूरे इलाके में उबाल ला दिया है। लोग खुलकर पूछ रहे हैं—
क्या “विकास” के नाम पर सुकमा को प्रदूषण की भेंट चढ़ाया जा रहा है?
क्या पर्यावरणीय नियमों को दरकिनार कर यह फैसला लिया गया?
क्या इस परियोजना का निष्पक्ष और वैज्ञानिक आकलन हुआ है?
अगर भविष्य में नुकसान हुआ तो जिम्मेदार कौन होगा?
पहले भी झेल चुका है इलाका प्रदूषण की मार
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले भी इस तरह के डंपिंग और खनन गतिविधियों के कारण—
हवा में जहरीली धूल का स्तर बढ़ा
जल स्रोत प्रभावित हुए
शहर में भारी वाहनों से यातायात और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा
अब इतनी बड़ी मात्रा में टेलिंग्स डंपिंग से हालात और बदतर होने की आशंका जताई जा रही है।
विशेषज्ञों की चेतावनी — “यह फैसला भविष्य तय करेगा”
पर्यावरण विशेषज्ञ साफ चेतावनी दे रहे हैं कि आज लिए गए ऐसे फैसले आने वाली पीढ़ियों की सेहत और जीवनशैली को सीधे प्रभावित करेंगे। अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो सुकमा को गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना करना पड़ सकता है।
अंतिम सवाल — जवाब से नहीं बच सकता प्रशासन
क्या सुकमा की पहचान “लाल मिट्टी” के रूप में विकास का प्रतीक बनेगी,
या फिर यही “लाल ज़हर” बनकर आने वाले वर्षों में तबाही की कहानी लिखेगी?
अब यह सिर्फ एक परियोजना नहीं, बल्कि जनता बनाम फैसले की लड़ाई बन चुकी है…
और इस बार जवाब देना ही होगा।


Comments