दुर्ग : निजी स्कूलों द्वारा हर साल फीस बढ़ाए जाने और गर्मी की छुट्टियों में भी फीस वसूले जाने के खिलाफ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव अय्यूब खान ने अभिभावकों के प्रतिनिधिमंडल के साथ कलेक्टर दुर्ग के माध्यम से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि जिले के कई निजी स्कूल बिना किसी ठोस कारण के हर साल फीस में भारी बढ़ोतरी कर रहे हैं, जिससे मध्यम और गरीब वर्ग के अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस नेताओं और पालक प्रतिनिधियों ने कहा कि शिक्षा के नाम पर निजी स्कूल व्यवसाय कर रहे हैं।
“700 से 1000 रुपए तक बढ़ रही मासिक फीस”
अय्यूब खान ने बताया कि कई निजी स्कूल हर साल मासिक फीस में 700 से 1000 रुपए तक की वृद्धि कर देते हैं, जिससे सालाना फीस में 10 से 12 हजार रुपए तक का अतिरिक्त भार पड़ता है। उन्होंने कहा कि कुछ स्कूल अपनी प्रसिद्धि का गलत फायदा उठाकर मनमानी फीस वसूल रहे हैं।
ज्ञापन में मांग की गई कि निजी स्कूलों को फीस बढ़ाने से पहले सरकार की अनुमति लेना अनिवार्य किया जाए और फीस वृद्धि के कारणों को सार्वजनिक करना चाहिए।
गर्मी की छुट्टियों में फीस वसूली पर भी सवाल
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने यह मुद्दा भी उठाया कि ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान स्कूल बंद रहते हैं और परिवहन सेवाएं भी संचालित नहीं होतीं, इसके बावजूद तीन माह की पूरी ट्यूशन और ट्रांसपोर्ट फीस वसूली जाती है, जो अनुचित है।
प्रतिनिधिमंडल ने शासन से “नो स्कूल-नो फीस” नियम लागू करने की मांग करते हुए कहा कि अप्रैल, मई और जून में फीस वसूली पर रोक लगाई जाए।
बड़ी संख्या में पालक प्रतिनिधि रहे मौजूद
कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपने के दौरान संदीप बख्शी, जसवंत गायकवाड, राकेश दुबे, अभिषेक जांगड़े सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और पालक प्रतिनिधि मौजूद रहे।
प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से निजी स्कूलों की फीस नीति पर नियंत्रण लगाने और अभिभावकों को राहत देने के लिए जल्द ठोस कदम उठाने की मांग की है।


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