जंगल कटे, तेंदुआ भटके… मुनादी से नहीं थम रहा गिधनी का खौफ,वन विभाग की निष्क्रियता पर ग्रामीणों में आक्रोश

जंगल कटे, तेंदुआ भटके… मुनादी से नहीं थम रहा गिधनी का खौफ,वन विभाग की निष्क्रियता पर ग्रामीणों में आक्रोश

 

 

खुलेआम गांव में घूम रहा तेंदुआ; दहशत में कैद हुई जिंदगी

 

 

परमेश्वर राजपूत, गरियाबंद /छुरा:नगर मुख्यालय छुरा से लगभग पांच किलोमीटर दूर स्थित ग्राम गिधनी इन दिनों तेंदुए के आतंक से दहशत में है। गांव की गलियों, चौक-चौराहों और रिहायशी इलाकों में खुलेआम तेंदुए की आवाजाही से ग्रामीण भयभीत हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि ग्रामीणों ने घरों से निकलना तक कम कर दिया है। महिलाएं पानी भरने हैंडपंप जाने से डर रही हैं, वहीं बच्चे और बुजुर्ग घरों में कैद होकर रह गए हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि तेंदुए की लगातार गतिविधियों की सूचना पाण्डुका वन परिक्षेत्र अधिकारी को दी गई थी, लेकिन वन विभाग ने केवल मुनादी कराकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली। गांव में न तो कोई रेस्क्यू टीम पहुंची, न ही निगरानी के लिए विशेष व्यवस्था की गई। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।

ग्रामीणों का कहना है कि जंगलों की अंधाधुंध कटाई और वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास खत्म होने के कारण अब जंगली जानवर गांवों की ओर रुख कर रहे हैं। लगातार घटते जंगल और बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप ने वन्यजीवों को भटकने पर मजबूर कर दिया है। तेंदुए का गांव में खुलेआम घूमना इसी गंभीर पर्यावरणीय असंतुलन का परिणाम माना जा रहा है।

गांव बना छावनी, सहमे लोग

तेंदुए के डर से गांव का सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। ग्रामीण शाम ढलते ही घरों में दुबकने को मजबूर हैं। खेतों की ओर जाना बंद हो गया है। कई परिवारों ने बच्चों को अकेले बाहर भेजना बंद कर दिया है। लोगों में हर समय किसी अनहोनी की आशंका बनी हुई है।

ग्रामीणों ने कहा कि यदि समय रहते वन विभाग ने प्रभावी कदम नहीं उठाए और कोई हादसा हो गया तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और वन विभाग की होगी। लोगों ने चेतावनी दी कि यदि विभाग की लापरवाही जारी रही तो ग्रामीण आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

20 साल पुरानी घटना फिर आई याद

ग्रामीणों ने करीब 20 वर्ष पहले ग्राम निशानी दादर में हुई घटना का भी जिक्र किया। उस समय भी एक तेंदुए ने क्षेत्र में आतंक मचा रखा था। ग्रामीणों द्वारा बार-बार सूचना देने के बावजूद वन विभाग मौके पर नहीं पहुंचा था। बाद में तेंदुआ एक घर में घुस गया, जहां जान बचाने के लिए ग्रामीणों ने मिलकर उस पर हमला कर दिया था।

ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग आज भी उसी पुरानी कार्यप्रणाली पर चल रहा है और किसी बड़ी घटना के इंतजार में बैठा है।

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल रेस्क्यू टीम भेजने, गांव में लगातार निगरानी बढ़ाने, पिंजरा लगाने तथा रात में गश्त कराने की मांग की है। साथ ही जंगलों की अवैध कटाई पर रोक लगाकर वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित करने की आवश्यकता भी बताई है।








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